मेडिकल कॉलेज के लिए प्रस्तावित पराग डेयरी की भूमि। संवाद
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मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए प्रशासन की कवायद नाकाफी साबित हो रही है। जिलाधिकारी की ओर से पराग डेयरी की भूमि को सशुल्क उपलब्ध कराए जाने के लिए पांचवीं बार संयुक्त सचिव चिकित्सा शिक्षा अनुभाग को पत्र भेजा गया है, लेकिन अभी तक पत्र पर शासन की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इस कारण जिलेवासियों का बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का सपना अभी तक अधूरा है।
जिले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की घोषणा प्रदेश सरकार ने चार साल पूर्व की थी। केंद्र सरकार की ओर से बजट का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद भूमि का निर्धारण शासन की ओर से नहीं किया जा रहा है। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार होते हुए भी सरकार भूमि का हस्तांतरण न हो पाना तमाम दावों की कलई खोल रहा है।
जिलाधिकारी की ओर से 20 सिंतबर, 18 अक्तूबर, 2 नवंबर, 16 नवंबर को हाथरस में पीपीपी मोड के तहत बनाए जाने वाले मेडिकल कॉलेज के लिए दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड सासनी की खाली पड़ी भूमि को चिकित्सा शिक्षा विभाग को सुशल्क हस्तांतरित किए जाने के लिए पत्र लिखा गया है।
हैरानी की बात यह है कि डीएम ने फिर से 28 दिसंबर को भी एक पत्र फिर से इसी संदर्भ में भेजा है। डीएम ने चिह्नांकित 6.675 हेक्टेयर भूमि को चिकित्सा शिक्षा विभाग को सशुल्क हस्तांतरित किए जाने के संबंध में अनुरोध किया है, लेकिन कई बार पत्राचार के बाद भी भूमि के हस्तांतरण की प्रकिया लटकी हुई है।
मुख्यमंत्री की घोषणा है, इसलिए मेडिकल कॉलेज जरूर बनेगा। प्राण जाए पर वचन न जाए की परंपरा पर हमारी सरकार काम कर रही है। जहां तक भूमि के चयन की बात है, केंद्र सरकार के सहयोग से मेडिकल बनेगा। मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि के चयन की प्रक्रिया चल रही है। लखनऊ जा रहीं हूं। इस मामले में व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री से वार्ता करुंगी।
-अंजुला माहौर, सदर विधायक।