अप्रैल 1992 में लोकसभा व विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई। भाजपा को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार मिली। छह दिसंबर 1992 को देश से लाखों की संख्या में रामभक्त कारसेवक अयोध्या में एकत्रित हो गए थे। अशोक चौहान रमनपुर, कृष्ण मुरारी वार्ष्णेय, राम नारायण वार्ष्णेय, बाबा श्याम शर्मा साथ गए।
अक्तूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि मंदिर को मुक्त कराने के लिए दक्षिण भारत से रथयात्रा शुरू की थी। सारे देश में राम भक्तों और भाजपा, आरएसएस के कार्यकर्ताओं को नेताओं ने प्रदर्शन व आंदोलन शुरू कर दिया था। हाथरस शहर में भी आंदोलन शुरू हो गया था।
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पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने बताया कि हम सब करीब 50 लोगों को पुलिस ने पकड़कर आगरा जिला जेल में बंद कर दिया था। हाथरस से भी महिलाओं का जत्था भी आंदोलन करते समय पकड़कर सेंट्रल जेल आगरा में बंद कर दिया गया था। जिसमें भाजपा की पूर्व जिलाध्यक्ष कुसमादेवी मदनावत, प्रकाशवती आर्य, रेनू, रजनी आदि थीं। अयोध्या में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था। इसके बावजूद कारसेवक राम भक्त अयोध्या गए।
अप्रैल 1992 में लोकसभा व विधानसभा चुनावों की घोषणा हो गई। भाजपा को उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार मिली। छह दिसंबर 1992 को देश से लाखों की संख्या में रामभक्त कारसेवक अयोध्या में एकत्रित हो गए थे। अशोक चौहान रमनपुर, कृष्ण मुरारी वार्ष्णेय, राम नारायण वार्ष्णेय, बाबा श्याम शर्मा साथ गए।
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दिसंबर 1992 को अयोध्या पहुंचे थे। दो दिन बाद ही अयोध्या में रामभक्तों की कारसेवा छह दिसंबर 1992 को शुरू हुई। लाखों लोग अयोध्या में थे। अयोध्या छावनी बनी हुई थी। जब यात्रा शुरू हुई तो अयोध्या की सारी सड़कें भर गई थीं। हमारे मार्गदर्शकों ने कहा था कि सरयू में स्नान करके एक मुट्ठी बालू लाकर कारसेवा करनी है।