ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में खेड़ा फिरोजपुर की मंजू देवी एक मिसाल बनकर उभरी हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को संगठित कर अमरूद की बागबानी के जरिये रोजगार का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे गांव की कई महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं।
मंजू देवी के नेतृत्व में 11 महिलाओं के स्वयं सहायता समूह ने करीब 17 बीघा का अमरूद का बाग किराये पर लिया। शुरुआत में महिलाओं के सामने खेती और बाग की देखभाल के लिए कई चुनौतियां थीं, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने इसे सफल व्यवसाय में बदल दिया। समूह की महिलाएं बाग में पानी लगाने से लेकर खाद, सफाई और फलों की देखरेख तक का कार्य स्वयं करती हैं।
बाग में पैदा होने वाले अमरूद को स्थानीय बाजारों में बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा रहा है। मंजू देवी बताती हैं कि पिछले चार वर्षों से समूह को हर साल करीब तीन से पांच लाख रुपये तक का लाभ हो रहा है। इस आय से महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे अपने बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।
समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब अपनी मेहनत से आय अर्जित कर आत्मविश्वास महसूस कर रही हैं। गांव की अन्य महिलाएं भी इस पहल से प्रेरित होकर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने में रुचि दिखा रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं की यह पहल न केवल आर्थिक सशक्तीकरण का उदाहरण बन रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से महिलाएं खेती और उद्यम के क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं।