हाथरस। ग्राम पंचायतों को विकास के लिए दी गई धनराशि के इस्तेमाल में गड़बड़ियाें की बू आ रही है। पंचायतराज विभाग ने फरवरी में सभी ग्राम पंचायतों को नोटिस देकर 13वें, 14वें और राज्य वित्त आयोग के तहत दी गई धनराशि के उपभोग और कार्य पूर्ति के प्रमाण पत्र मांगे थे, लेकिन आज तक किसी भी ग्राम पंचायत ने यह अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं।
इसके चलते इन पंचायतों की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है। डीपीआरओ ने एक बार फिर इन ग्राम पंचायतों को नोटिस जारी किया है और उनसे कहा है कि इन योजनाओं का हिसाब-किताब देने में की जा रही हीला-हवाली ग्राम प्रधान और सचिवों की लापरवाही और वित्तीय अनियमितताओं का प्रतीक है।
उन्होंने इन पंचायतों को आगाह किया है कि वह वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक ग्राम पंचायतों को अवमुक्त की गई धनराशि के सापेक्ष इस्तेमाल की गई धनराशि का उपभोग और कार्यपूर्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, अन्यथा धनराशि को दुरुपयोग की श्रेणी में मानते हुए संबंधित सचिवों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और ग्राम प्रधानों के खिलाफ पंचायतराज अधिनियम की धारा 95 (1) (छह) के तहत उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों के प्रयोग पर रोक लगाते हुए डीएम के माध्यम से तीन सदस्यीय कमेटी गठित करा दी जाएगी।
पंचायतराज अधिनियम की धारा 27 (2) के तहत धनराशि की आधी-आधी वसूली संबंधित सचिव और ग्राम प्रधान से बकाया भू राजस्व की तरह की जाएगी। संबंधित एडीओ पंचायत के खिलाफ भी पर्यवेक्षण में लापरवाही के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए निदेशक पंचायतराज को संस्तुति भेज दी जाएगी। कानूनी कार्रवाई भी अलग से की जाएगी।