उपनिदेशक उद्यान डाॅ. बलजीत सिंह ने बताया कि हर पेड़ की एक उम्र होती है, आम का वृक्ष भी 30-40 साल बाद फल देना बंद कर देता है। ऐसे बागों का जीर्णोंद्धार किया जा सकता है। भूजल स्तर गिरने से भी फल देना बंद कर देता है।
सासनी का आम खाने में भी बहुत ही स्वादिष्ट था। कल तक जहां बाग थे, वहां आज किसान गेहूं, बाजरा, आलू की खेती कर रहे हैं। मेरे पास भी 25 बीघा का बाग था। आज यहां अन्य फसलें हो रही हैं।- प्रकाश चंद्र शर्मा, सासनी
क्षेत्र में आम के 300 से ज्यादा बाग थे, देश-विदेश तक सासनी का आम जाना जाता था। संसाधनों की कमी, भूजल स्तर कम होने से ये खत्म हो गए। क्षेत्र से आम की मिठास भी चली गई है।- हरिकिशन शर्मा, सासनी
इन प्रांतों में जाता था आम
सासनी का आम दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र में जाता था। आम उत्पादन में सासनी खुद एक ब्रांड बन गया था।