कृषि उत्पादन मंडी समिति सोमवार से लगातार नकदी की कमी के कारण बंद चल रही है, लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो सका है। इस स्थिति पर विचार करने के लिए आढ़तिया एसोसिएशन की बैठक होगी।
मंडी समिति में पिछले सप्ताह तक कारोबार चल रहा था। इस कारोबार में मंडी में किसान अपनी आवश्यक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पुराने नोटों का उपयोग कर रहे थे। आठ नवंबर की रात में हुई नोटबंदी के बाद 19 नवंबर तक मंडी में अनवरत रूप से काम होता रहा, लेकिन अब कारोबार संचालन के लिए पर्याप्त मुद्रा प्रदान करने की मांग को लेकर मंडी में कारोबार बंद कर दिया गया, लेकिन अभी तक नगदी के हालात तो जस के तस बने हुए हैं।
बुधवार को व्यापारियों ने मंडी में मुनादी कराई कि गुरुवार को आगामी हालात पर चर्चा के लिए बैठक की जाएगी, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
इधर, मंडी बंद होने के कारण यहां पल्लेदारों की आवाजाही ठप हो गई है। जो पल्लेदार आए भी वह काफी हताश और निराश दिखाई दिए। इन लोगों ने मंडी में पुराने कामों को अपने आढ़तियों के साथ निपटवाया। कुछ ने तो अपनी दुकानों में भरे कबाडे़ को भी साफ करवाने का काम किया।
-मंडी बंद का निर्णय आढ़तियों और व्यापारियों का है। मंडी प्रशासन का इससे कोई लेना-देना नहीं हैं। मंडी को तो इस बंदी से प्रतिदिन करीब तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
- रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव
वहीं नोटबंदी के बाद आखिरकार कृषि उत्पादन मंडी समिति हाथरस का कारोबार भी ठप हो गया। पिछले दो दिनों से नकदी के अभाव में किसानों के भुगतान में आ रही कठिनाइयों के कारण आढ़तियों ने कारोबार बंद कर दिया। इन व्यापारियों की मांग है कि सरकार या तो पुरानी मुद्रा के चलन को बरकरार रखे या फिर पर्याप्त मुद्रा बाजार में उपलब्ध कराए, जिससे कारोबार को विधिवत रूप से संचालित किया जा सके।
कृषि उत्पादन मंडी समिति हाथरस में इस समय धान का बड़ा कारोबार चल रहा था, जिसमें आढ़तियों और किसानों के बीच करोड़ों का कारोबार हो रहा है, क्योंकि धान के रेट दो हजार रुपये प्रति क्विंटल होने से किसान अगर एक ट्रॉली धान भी लाता है तो वह 40 से 50 क्विंटल होता है, जिसकी कीमत एक लाख रुपये के आसपास होती है।
इस रकम का भुगतान करने के लिए आढ़तियों के अकाउंट में तो पैसा है, लेकिन उन अकाउंट्स से उसकी निकासी नहीं हो पा रही, जिससे वह किसानों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, जबकि किसान को अपनी रबी की फसल की तैयारियों में नकदी की सख्त जरूरत है। उधर, मंडी सचिव रामबाबू शर्मा का कहना है कि नोट बंदी की समस्या से पूरा देश जूझ रहा है। हाथरस मंडी पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मंडी को प्रतिदिन करीब तीन लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
- मंडी में धान को बेचने इसलिए आ रहे हैं कि इस धान की बिक्री से मिलने वाले पैसे से वह अपनी रबी फसल के लिए खाद-बीज खरीद सकेंगे, लेकिन जब पैसा ही नहीं मिल रहा तो धान बेचने से क्या फायदा।
- मूलचंद, किसान बूधू
- धान की बिक्री के बाद भी हमें मंडी से नई करेंसी का नोट नहीं मिल पा रहा है। पुराने नोट बाजार में चल नहीं रहे हैं। इन हालात में धान बेचकर भी पैसे के लिए तड़पने के सिवाय हाथ कुछ नहीं लग रहा है।
- कांता प्रसाद, नगला मनी