लाल किले से प्रधानमंत्री के भाषण में जिक्र आने के बाद सुर्खियों में आए नगला फतेला से सटी ग्राम पंचायत खेड़ा फिरोजपुर के मजरा रामनगर की हकीकत भी चौंकानी वाली है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में एक दशक पहले विद्युतीकरण लाइन में आज तक करंट नहीं दौड़ा।
जुगाड़ की बिजली से आज भी गांव के घर रोशन हो रहे हैं। आबादी के करीब लगे आठ नलकूप की लाइन पर कटिया कनेक्शन कर ग्रामीण बिजली का उपयोग कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार विद्युतीकरण की लाइन बनने से पहले गांव में करीब 150 कनेक्शन भी हैं, लेकिन यह कनेक्शन जुगाड़ से ही चल रहे हैं। ‘अमर उजाला ’ की टीम ने गांव का दौरा किया तो हकीकत खुलकर सामने आई।
परिसीमन में रामनगर पंचायत खत्म
नए परिसीमन में रामनगर के ग्राम पंचायत का दर्जा समाप्त कर खेड़ा फिरोजपुर में समायोजित कर दिया गया। इस गांव में करीब 170 परिवार हैं। करीब 608 मतदाता हैं। ब्राह्मण, जाट, जाटव, नाई, धीवर, कोरी और खटिक आदि जातियों की आबादी है।
25 साल पहले लगे थे सात पोल
25 साल पहले गांव में सात पोल लगे थे, जिन पर आज तक तार नहीं खींचे गए। एक दशक पहले राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में 17 पोल लगाए गए। एचटी लाइन के साथ ट्रांसफार्मर भी लगा, लेकिन एक दशक बाद भी इस लाइन में करंट नहीं दौड़ा है।
सासनी के गांव रामनगर में विद्युतीकरण के बाद भी बिजली न आने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह इसकी जांच कराएंगे। हां इतना जरूर है कि पहले मानक कुछ और थे, और अब कुछ और हैं। पहले नलकूप लाइनों से ही बल्ब ट्यूलाइट जला सकते थे, लेकिन अब नलकूप और घरेलू कनेक्शन की लाइन अलग हो गई हैं। - महेश कुमार, एक्सईएन, तृतीय खंड