मक्का उत्पादक किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। खुले बाजार में मक्का के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे गिर गए हैं, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल 500 से 1000 रुपये तक का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इस सीजन में अब तक मंडी में मक्का की कुल आवक दो लाख 17 हजार क्विंटल तक पहुंच चुकी है। अगर पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 30 जून तक मंडी में महज एक लाख क्विंटल मक्का आई थी। इस लिहाज से आवक पिछले साल के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है, लेकिन किसानों को निराशा ही हाथ लगी है। मंडी में मक्का के रेट 1400 रुपये से लेकर 1900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहे हैं, जो कि सरकारी रेट से बेहद कम हैं।
सात क्रय केंद्रों पर सिर्फ 675 क्विंटल की खरीद
प्रशासन की ओर से एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए जिले में सात मक्का क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इन पर मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकारी रेट और मंडी के रेट में 500 से 1000 रुपये का बड़ा अंतर होने के बावजूद नमी, तकनीकी दिक्कतों, कड़े मानकों या देरी के चलते किसान सरकारी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। यही वजह है कि इन सभी क्रय केंद्रों पर अब तक महज 675 क्विंटल मक्का की ही आवक हो सकी है, जो कुल उत्पादन के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
17 हजार हेक्टेयर में हुई है मक्के की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जिले में मक्का का कुल रकबा 17 हजार हेक्टेयर रहा है। बंपर पैदावार के बाद किसानों को उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी, लेकिन मंडी के मौजूदा हालातों ने उनकी कमर तोड़ दी है। किसानों का कहना है कि लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है और वे मजबूरी में आढ़तियों को कम दाम पर फसल बेचने पर मजबूर हैं।
एक नजर में आंकड़े
कुल रकबा : 17 हजार हेक्टेयर
मंडी में कुल आवक : 2,17,000 क्विंटल
पिछले साल (30 जून तक) आवक : 1,00,000 क्विंटल
सरकारी क्रय केंद्र : 7
क्रय केंद्रों पर अब तक आवक : 675 क्विंटल
सरकारी एमएसपी : 2400 रुपये प्रति क्विंटल
मंडी में वर्तमान रेट : 1400 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल
क्रय केंद्र पर मक्का की खरीद मानक के अनुरूप की जा रही है। अब तक करीब 675 क्विंटल मक्का खरीदी जा चुकी है।
-कमला प्रसाद यादव, डिप्टी आरएमओ।
इस बार मंडी में पिछले साल से अब तक दोगुनी से अधिक मक्का आ चुकी है। मक्का में नमी जरूर आ रही है, लेकिन मंडी में मक्का खरीदी जा रही है।
-अनिल कुमार, मंडी सचिव