जिले को हरा भरा बनाने के लिए हर साल पौधरोपण होता है और हर साल अभियान चलते हैं। पिछले पांच सालों में ही जिले में करीब 97.28 लाख पौधों को रोपा गया है। जिले का कुल रक्बा 1840 वर्ग किलोमीटर है। इसे मीटर में तब्दील करें तो यह 18.40 लाख वर्ग मीटर बैठता है। एक मीटर की दूरी पर भी एक पौधा भी लगाया जाए तो पूरे जिले में नया पौधा लगाने की जगह भी नहीं बचती। यानी कागजों में तो खूब हरियाली है, लेकिन जिधर देखों, उधर जगह खाली है।
इस बार जिले को 23 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है। पूर्व में रोपे गए पौधों का आंकड़ा देखे तो अभियान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हर साल जिस तरह से पौधरोपण हो रहा है, उस अनुपात में हरियाली क्यों नहीं बढ़ रही है। पिछले पांच सालों में दस से 25 लाख तक पौधे हर साल रोपे गए। पौधरोपण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए वन विभाग के अलावा अन्य विभागों को भी लक्ष्य दिया जाता है।
पूरा प्रशासनिक अमला इसमें जुटता है। अब तो विभाग के अधिकारी व कर्मचारी जीओ टैगिंग कर पौधा रोपने का स्थान एप में दर्ज कराते हैं। लेकिन इसके बाद भी बड़ी संख्या में पौधे सूख रहे हैं। लगाने के बाद पौधों की देखभाल नहीं की जाती और उनमें से अधिकांश सूख जाते हैं। इनमें से काफी संख्या में लगने से पहले ही सूख जाते हैं। बड़ा सवाल इस बार भी यही है कि 23 लाख पौधे लगाए कहां जाएंगे, क्या इस बार भी अभियान का हाल पिछले सालों के जैसा होगा। संवाद
पर्यावरण दिवस का समय नहीं पौधरोपण के लिए अनुकूल
पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दौरान तमाम संगठन और विभागों के अधिकारी पौधरोपण करते हैं। पर्यावरण दिवस उस समय आता है,जब नौतपा चल रहा होता है और इस समय भीषण गर्मी पड़ती है और मानसून और प्री मानसून इसके करीब एक माह बाद आता है। ऐसे में इस दिन पोधरोपण की रस्म अदायगी तो होती है, लेकिन बाद में उनका ध्यान नहीं रखा जाता और गर्मी में अधिकांश पौधे सूख जाते हैं।
वर्ष रोपित पौधे(लाख में)
2018 10.63
2019 17.88
2020 17.30
2021 25.70
2022 25.75
97.28 लाख पौधे रोपे गए हाथरस में पांच साल में
18.40 लाख वर्ग मीटर है जिले का कुल रक्बा
23 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य मिला फिर इस बार
जिले में विभागवार पौधरोपण के लिए लक्ष्य दिया जाता है। विभागों की ओर से चयनित भूमि पर पौधरोपण कराए जाते हैं। इन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है। पौधों के सूखने की दशा में नए पौधे रोपित किए जाते हैं।
-डॉ. सीपी सिंह, डीएफओ।