विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट राम प्रताप सिंह के न्यायालय ने अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति की हत्या के एक आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर दोषी को अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
अभियोजन पक्ष के अनुसार थाना सिकंदराराऊ में गांव फरीदाबाद निवासी मनोज कुमार पुत्र बाबूलाल जाटव ने तहरीर देकर कहा था कि 24 दिसंबर 2010 को रात करीब नौ बजे वह और उनका परिवार घर पर था। उसी समय घर पर चरन सिंह पुत्र शंकर जाति यादव निवासी ग्राम फरीदाबाद आए और भाई गेंदालाल उर्फ पिंटू पुत्र बाबूलाल को यह कहकर अपने साथ ले गए कि तुझे 100 रुपये मिलेंगे। हमारे ट्रैक्टर पर काम करना है। उस समय घर पर उनकी पत्नी और साला भी मौजूद थे। सुबह करीब पांच बजे जब चरन सिंह ट्रैक्टर लेकर गांव आ गया तो उन्होंने पूछा कि भाई कहां है तो जवाब मिला कि मुझे नहीं पता। उन्होंने और और अन्य परिजनों ने भाई को तलाशना शुरू किया।
25 दिसंबर 2010 को सुबह करीब 9 बजे उमर उर्फ छुट्टन निवासी सिकंदराराऊ के खेत में उनके भाई का बिना सिर का शव मिला। इस प्रकरण में थाना सिकंदराराऊ में मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचक ने विवेचना करते हुए आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामप्रताप सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत आरोपी चरन सिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी एडीजीसी दिनेश यादव ने की।