कलेक्ट्रेट से ज्ञापन देकर लौटते लेखपाल। स्रोत : स्वयं
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उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ की हाथरस शाखा के लेखपालों ने लंबित समस्याओं के निराकरण की मांग और ''''फार्मर रजिस्ट्री'''' के नाम पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर प्रशासन के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। संघ ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर कहा है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो जिले के समस्त लेखपाल आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
लेखपालों ने रोष व्यक्त किया कि जिले के 19 लेखपालों से फार्मर रजिस्ट्री में आपेक्षित प्रगति न होने पर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। संघ का कहना है कि लेखपाल कठिन परिश्रम कर रहे हैं, जबकि पंचायत, कृषि और पूर्ति विभाग इस कार्य में कोई सहयोग नहीं कर रहे। आरोप लगाया कि कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई त्रुटिपूर्ण सूची के कारण उनकी प्रगति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।
तहसीलों में लेखपालों की कमी है। एक-एक लेखपाल दो से तीन क्षेत्रों का कार्य देख रहे हैं। कार्यालयों में संबद्ध लेखपालों को हटाकर फील्ड में तैनात किया जाए। चिकित्सा प्रतिपूर्ति, टीए, डीए और कृषि गणना जैसे विभिन्न मदों का भुगतान पिछले कई वर्षों से लंबित है।
लेखपाल अतुल जयसवाल का पांच माह का वेतन एरियर भुगतान न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संघ ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि दैवी आपदा को छोड़कर, अवकाश के दिनों में लेखपाल कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
जिला मंत्री डालचंद्र और जिला अध्यक्ष बलवीर सिंह ने कहा कि लेखपालों का शोषण बंद किया जाए और उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों पर विचार कर उन्हें वापस लिया जाए। यदि 15 दिन में समाधान नहीं हुआ, तो होने वाले आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव चौधरी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीन शर्मा, उपमंत्री नवनीत भारद्वाज, कोषाध्यक्ष दिलीप अग्रवाल आदि मौजूद रहे।