कानऊ में राम बरात निकालने पर पुलिस से होती स्थानीय लोगों की नोकझोंक। संवाद
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गांव कानऊ में रविवार शाम निकलने वाली श्रीराम बरात को पुलिस ने अनुमति न होने का हवाला देकर रोक दिया। इससे ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बरात की तैयारियां पूरी थीं, लेकिन अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हो गया। हालांकि देर शाम को पुलिस से काफी जद्दोजहद के बाद बरात निकाली गई।
गांव में करीब 30 वर्षों से श्रीरामलीला महोत्सव का आयोजन होता आ रहा है। इस बार कमेटी अध्यक्ष शंकरलाल ने एसडीएम सिकंदराराऊ धर्मेंद्र सिंह चौहान से रामलीला आयोजन की अनुमति ली थी। इसमें पुलिस, खंड विकास अधिकारी और विद्युत विभाग के एसडीओ की आख्या भी शामिल थी। आयोजकों का कहना है कि रामलीला के दौरान परंपरागत रूप से श्रीराम बरात भी निकाली जाती रही है।
पुलिस का कहना है कि अनुमति पत्र में बरात निकालने का उल्लेख नहीं है। इसलिए आयोजकों को पहले इसकी अलग अनुमति लेने के लिए कहा गया है। सूचना मिलने पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्वेता सिंह के प्रतिनिधि और उनके पति सुमंत किशोर सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि रामलीला की अनुमति होने के कारण बरात रोकना उचित नहीं है।
बारात के लिए भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, राजा दशरथ, सुमंत और गुरु वशिष्ठ सहित अन्य स्वरूप तैयार थे। कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर मनीष चिकारा ने बताया कि बरात की अनुमति मिलने के बाद ही आयोजन की इजाजत दी जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत जारी रही।