अंतरराष्ट्रीय हो सकता है गिरोह
दो साल से जितने बड़े पैमाने पर बैंक खाते खोले जा रहे हैं, उससे साफ है कि साइबर ठगों का गिरोह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी में शामिल हो सकता है। यह साइबर ठगों की सबसे निचली कड़ी है, जो केवल खाते खोलकर ऊपर ठगों को उपलब्ध कराती है।
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जिले में सामने आ चुके हैं म्यूल खाते
24 जुलाई को पुलिस ने ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो म्यूल खाते खुलवाकर साइबर ठगी की रकम ठिकाने लगवाता था। पुलिस ने मुरसान के गांव चमरुआ निवासी माधव शर्मा को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से फर्जी आधार, शेल कंपनियों के दस्तावेज, बैंक चेक आदि सामान मिला था। माधव उज्जैन में बैठे पेडलर के इशारे पर यहां खाते खोल रहा था और उन्हें ठगों को दे रहा था। माधव ने रुपये के लालच में अपने तीन दोस्तों को भी शामिल कर लिया था।
घर छोड़कर भागे शातिर
माधव की गिरफ्तारी के बाद अमर उजाला में 27 जुलाई के अंक में संवाद न्यूज एजेंसी की खबर प्रकाशित हुई थी, जिसमें दो हजार के लालच में लोगों द्वारा खाता देने का मामला उजागर किया गया था। बताते हैं कि माधव की गिरफ्तारी व खातों के खेल के खुलासे के बाद ही सहपऊ के सरगना घर छोड़कर भाग गए थे। अब पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।