नगर पालिका में फर्जी एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) के जरिये करोड़ों रुपये के टेंडर दिए जाने के मामले में अवर अभियंता जलकल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। एडीएम न्यायिक की आख्या पर उन्हें कलक्ट्रेट से संबद्ध कर लिया गया है। अमर उजाला ने 12 मार्च के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
नगर पालिका परिषद की टेंडर प्रक्रिया में फर्जी एफडीआर के इस्तेमाल का खुलासा हुआ था। करीब दो करोड़ रुपये के बिजली से संबंधित कार्य कराए जाने के लिए उठाए गए टेंडरों में फर्माें की तरफ से फर्जी एफडीआर देने की बात सामने आई थी। जिन बैंक से यह एफडीआर जारी होना दर्शाया गया है, उन्होंने अपने जवाब में साफ कहा कि यह उनके यहां से नहीं बनी हैं।
नगर पालिका की ओर से 30 स्थानों पर 12.5 मीटर ऊंचे हाईमास्ट खंभों पर 170 से 200 वाट की लाइट आपूर्ति के लिए जैम पोर्टल के माध्यम से निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। निविदा में चार फर्मों की बिड स्वीकृत हुईं। इन फर्माेें ने जो एफडीआर टेंडर के साथ जमा कराईं, उनमें से दो का सत्यापन अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह ने कराया, जबकि दो फर्मों की एफडीआर का सत्यापन अवर अभियंता ने खुद कराया था।
ईओ की ओर से जब दोबारा उन दो फर्मों की एफडीआर का सत्यापन कराया गया, जिनका सत्यापन पहले अवर अभियंता ने कराया था तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। पूरे मामले की जांच एडीएम न्यायिक शिवनारायण शर्मा को दी गई। उनकी जांच आख्या के आधार पर जिला प्रशासन ने अवर अभियंता के खिलाफ कार्रवाई की है।