मुराद शहरबानो का इकलौता बेटा था। शादी के एक साल बाद उनके एक बेटा पैदा हुआ, जो जन्म के बाद ही मर गया। दूसरा बेटा भी तीन माह ही जीवित रह सका और दो वर्षीय मुराद भी शहर बानो की गोद सूनी कर गया।
सहपऊ कस्बा के मोहल्ला पुराना थाना में 29 अगस्त देर शाम एक दो वर्षीय मासूम मुराद की पानी से भरी बाल्टी में डूबने से मौत हो गई। मासूम परिवार का इकलौता चिराग था। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
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कस्बा के पुराना थाना मोहल्ला निवासी जफरुद्दीन उर्फ लाला की पुत्री शहरबानो का निकाह बदायूं के गांव बिल्सी निवासी सानू के साथ हुआ था। वह निकाह के बाद मायके में ही रह रहीं थीं। उनके पति सानू उत्तराखंड में मजदूरी करते हैं। शाम को शहरबानो घर में आराम कर रहीं थीं और उनकी मां नफीसा बेगम बकरी चराने गईं थीं। पिता जफरुद्दीन भी बकरियों के लिए चारा कटवाने गए थे।
इस दौरान शहरबानो की भतीजी सोना उनके घर आई तो उसने मुराद को बाल्टी में गिरा देखा। यह देखकर वह चीख पड़ी। चीख सुनकर मुराद की मां व अन्य लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे। सभी लोग मिलकर उसे सीएचसी ले गए, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे से परिवार में कोहराम मच गया।
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तीसरा बेटा भी सूनी कर गया शहरबानो की गोद
मुराद शहरबानो का इकलौता बेटा था। शादी के एक साल बाद उनके एक बेटा पैदा हुआ, जो जन्म के बाद ही मर गया। दूसरा बेटा भी तीन माह ही जीवित रह सका और दो वर्षीय मुराद भी शहर बानो की गोद सूनी कर गया। परिजनों का रो-रोकर यही कहना था कि मुराद भी बीमार चल रहा था। इस इकलौते चिराग को बचाने के लिए भी शहरबानो अब तक करीब ढाई लाख रुपये खर्च कर चुकी थीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि मुराद भी उन्हें छोड़ जाएगा। हादसे के बाद शहरबानो बेहोशी की हालत में हैं।