कुकरगवां निवासी अध्यापक महावीर सिंह बालक के लिए देवदूत बनकर आए। महावीर सिंह जलेसर रोड (मानिकपुर) पर एक निजी स्कूल में पढ़ाते हैं। रोज की भांति वह सुबह स्कूल बाइक से जा रहे थे। अचानक अध्यापक की बाइक का पेट्रोल उसी कुएं के निकट समाप्त हो गया। इस दौरान बच्चे की आवाज सुनकर वह कुएं में झांकने लगे। अध्यापक का कहना है कि वह रोज शाम को बाइक में पेट्रोल आदि जांच करके रखते हैं। सोमवार को ही उन्हें बाइक में पेट्रोल देखने का ध्यान नहीं रखा। यह ईश्वर को मंजूर था कि उनके माध्यम से इस बच्चे की मदद होनी थी। कुएं से ही उसकी आवाज सुनने के बाद उन्होंने बच्चे से उसका नाम एवं गांव पूछा था। बच्चे ने सबकुछ बता दिया, तब उन्होंने आवाज देकर नगला बिहारी के लोगों को बुलाया। ग्रामीणों के साथ पुलिस भी कुएं पर पहुंच गई। इसके बाद नगला बिहारी निवासी दूरबीन सिंह दूसरे देवदूत बने। वह लगभग 30 फीट गहरे कुएं में रस्सी के सहारे उतरे और बालक को पीठ पर बांधकर कुएं से ऊपर लेकर आए।
डॉग स्क्वायड टीम कुएं से महज चंद कदमों की दूरी से लौटी
बालक ने बताया कि यह सही है कि उसे उसका सौतेला पिता अपने साथ ले गया था। ग्रामीणों के अनुसार वह हाथरस का निवासी है। बच्चे की मां की सास का भतीजा है। जब बच्चे की पिता मौत हुई तो उस समय उसकी मां के पास उसकी दो बहनें थीं। इस कारण बच्चे की मां ने दूसरी शादी करने के इंकार कर दिया। बाद में उसने अमर सिंह के साथ दूसरी शादी कर ली और वह हाथरस चली गई। वहां अमर सिंह ने उसके साथ मारपीट की तो वह वापस नगला बिहारी आ गई। इसके बाद अमर सिंह भी नगला बिहारी आ गया। 13 मई रात को खाना खाने के बाद अमर सिंह पहले बच्चे को पैदल और इसके बाद साइकिल पर बैठाकर ले गया। अमर जहां तक बच्चे को पैदल ले गया, वहां तक डॉग स्क्वायड जाता था और फिर लौट आता था। जिस स्थान से डॉग स्क्वायड आता था, वहां से कुएं की दूरी मात्र 50 मीटर है। इसके साथ कुएं के खेत पर तार लगे हैं। सवाल यह है कि बच्चा तारों के नीचे निकलकर कैसे कुएं तक पहुंचा।
बच्चे को जीवित देख चौंके ग्रामीण
मासूम कृष्णा रात के पूरे 10 घंटे तक कुएं में पड़ा रहा। अधिकांशत: कुएं में सूखने पर गैस बन जाती है, जो लोगों की मौत का कारण बनती है। जितने समय बच्चा कुएं में रहा, उतने समय न तो कुएं में गैस बनी और न ही कुएं में लगा लोहे का एंगल उसके शरीर पर कहीं लगा। बच्चे को जीवित देखकर ग्रामीण कह रहे थे कि जाको राखे साइयां मार सके न कोए..।
कृष्णा के पिता की चार साल पहले हो चुकी है मौत
मासूम कृष्णा के पिता बबलू की चार साल पहले मौत हो चुकी है। अब उसकी मां अपनी सास के भतीजे अमर सिंह के साथ रह रही है। इस घटना ने कई सवालों को खड़ा कर दिया है।