वित्तीय वर्ष 2022-23 के अलावा अन्य पिछले वित्तीय वर्षों में दाखिल की गई विवरणियों के संबंध में ई-स्क्रूटनी के मुकदमों के फैसलों का इंतजार किया जा रहा है। 31 मार्च तक सभी मुकदमों में आयकर विभाग को निर्णय ईमेल पर जारी करने होंगे।
वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद से ही आयकर की विवरणियां दाखिल किए जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जुलाई व अगस्त माह तक लगभग सभी विवरणियां दाखिल हो जाती हैं, इसलिए अब 31 मार्च के दिन अधिक व्यस्तता नहीं रहती। अब यह तिथि आयकर दाताओं के लिए नहीं, बल्कि विभागीय अधिकारियों के लिए अंतिम होती है।
इस 31 मार्च तक ई-स्क्रूटनी के केसों पर विभाग को अपने निर्णय देने हैं। इसके आधार पर आयकरदाता आगे की रणनीति तय करेंगे। आयकरदाता के खिलाफ जारी निर्णय पर उन्हें अपील करनी होगी। इसके लिए भी समय सीमित होता है, इसलिए अब करदाताओं केसों के निर्णय आने का इंतजार है। माना जा रहा है कि इस साल करीब तीन हजार ई-स्क्रूटनी के केसों पर 31 मार्च तक निर्णय आएगा।
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अब ई-स्कूटनी में होते हैं फेसलेस केस।
आयकर की ई-स्क्रूटनी में दाखिल विवरणी में से कुछ फाइलों को अलग किया जाता है। इन्हें मुकदमों का निस्तारण कराए जाने के लिए ऑनलाइन नोटिस जारी होते है। इनकम टैक्स के पोर्टल व ई-मेल पर सवाल-जवाब किए जाते हैं। इसमें आयकर दाता को यह मालूम नहीं होता देश का कौन सा अधिकारी उनका केस कर रहा है और अधिकारी को यह मालूम नहीं होता कि वह किस करदाता को नोटिस जारी कर रहा है, सब कुछ फेसलेस है।
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इस साल 31 मार्च किसी रिटर्न की आखिरी तारीख नहीं है। इस बार 31 मार्च तक ई-स्क्रूटनी के अंतर्गत निर्णय आने का इंतजार है। निर्णय सामने आते ही करदाताओं को उनके अनुरूप आगे की कार्यवाही करनी होगी।
-मनीष टालीवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट