दाऊजी मेला परिसर में तैयार किए जाते झूले। संवाद
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राजकीय लक्खी मेला श्रीदाऊजी महाराज का शुभारंभ भले ही गणेश चतुर्थी के दिन ध्वजारोहण के साथ हो चुका हो, लेकिन बलदेव छठ को होने वाले विधिवत उद्घाटन से ठीक 48 घंटे पहले तक व्यवस्थाएं पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी हैं। तैयारियों को समय पर पूरा कराने की खातिर तहसील स्तरीय अधिकारियों को मेला परिसर में ही डेरा जमाना पड़ रहा है।
खुद एसडीएम सदर राजबहादुर सिंह तैयारियों के लिए निर्देश जारी करते दिखाई दिए। मंगलवार दोपहर तक मेला पंडाल के मुख्य मंच को तैयार किये जाने का कार्य पूरा कराने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। आनन-फानन में मंच को तैयार कराया गया, क्योंकि मंगलवार की रात इसी मंच पर देवी जागरण का भव्य कार्यक्रम प्रस्तावित था।
समय रहते काम पूरा न होने से अधिकारियों के माथे पर दिनभर चिंता की लकीरें नजर आईं। मेले के इतिहास में संभवत यह पहला मौका है, जब मुख्य मंदिर की प्राचीर और इमारत पर मेला शुरू होने के बाद तक रंग-रोगन का काम खिंच गया। गणेश चतुर्थी पर मंदिर के शिखर पर परंपरागत तरीके से ध्वज स्थापित कर दिया गया और प्राचीर पर रंग-बिरंगी फसाड लाइटें भी लगा दी गईं।
इसके बावजूद मंगलवार शाम तक मजदूर मंदिर की प्राचीर पर पेंट करते देखे गए। शुभारंभ के बाद भी पुताई का काम अधूरा रहने को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों में खासी चर्चा रही।
न झूले तैयार, न सजीं दुकानें
अभी तक एक भी बड़ा झूला चलने की स्थिति में तैयार नहीं हो पाया है। कारीगर अभी भी लोहे के ढांचे कसने में जुटे हैं। इसके अलावा दूर-दराज से आए दुकानदारों द्वारा दुकानें लगाने का काम भी बेहद धीमी रफ्तार से चल रहा है। सुरक्षा के लिहाज से लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की वायरिंग, अस्थायी बिजली लाइनों को खींचने और रास्तों की सजावट का काम भी समय सीमा में पूरा होने के आसार कम लग रहे हैं।