छोटे कियोस्क विज्ञापनों का तो कभी ठेका उठा ही नहीं, जबकि असली कमाई इन्हीं से है। यदि सही ढंग से विस्तृत जांच बैठाई जाए तो पिछले कार्यकाल में भी करोड़ों रुपये का खेल सामने आ सकता है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रोहित सिंह से यूनिपोल व कियोस्क के ठेके व जमा हुए टैक्स के बारे में पूछा गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
अलीगढ़ रोड दयानतपुर डिवाइडर पर ओक्टागोनल पोल पर लगभग 60 साइटें हैं। तालाब चौराहा से हतीसा से लगभग तीन 300 साइटें हैं। तालाब चौराहा के रेल ओवरब्रिज पर 40 साइटें हैं। मेंडू रोड पर सासनी गेट चौराहा से आदर्श नगर तक लगभग लगभग 60 साइटें हैं, जिनका सड़क के हिसाब से विज्ञापनदाताओं से एकमुश्त सौदा होता है।
दयानतपुर का 25 हजार रुपये महीने, ओवरब्रिज का लगभग 50 हजार रुपये महीने, मथुरा रोड का 50 हजार रुपये महीने है। इनके अलावा शहर में लगे हजारों बिजली के खंभों पर ढाई सौ रुपये महीना एक खंभा तय है। दो खंभों के बीच 10 गुणा छह फीट के फ्लैक्स लगे हैं, जिनसे लगभग 2,500 रुपये महीने की वसूली होती है। इन सभी छोटी साइटों में नगर पालिका को आज तक धेला नहीं मिला और न ही किसी ने इनका टेंडर उठाने की जहमत उठाई।
सड़क किनारे लगे बड़े विज्ञापन बैनर को पेंसिल पोल या साइड होर्डिंग कहा जाता है। एक पेंसिल पोल से पालिका को 57 हजार रुपये की कमाई होती है। शहर में लगभग 50 ऐसे पोल हैं। इस हिसाब से साल भर में लगभग 28.50 लाख रुपये का नुकसान पालिका को होता है।
ऐसे हुआ दो करोड़ का नुकसान
इस तरह से ढाई साल से नगर पालिका को लगभग दो करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। 60 यूनिपोल साइटों से एक साल में लगभग 74 लाख रुपये का राजस्व मिलता। सूत्रों के अनुसार ढाई साल में कुल 1.85 करोड़ में से केवल छह लाख ही जमा हो सके हैं। इसके अतिरिक्त पेंसिल पोल से 28 लाख प्राप्त होते, उसका ठेका ही नहीं उठा।
विज्ञापन एजेंसियों को होर्डिंग से होने वाली अनुमानित कमाई
प्रचार के प्रकार संख्या लगभग कमाई(सालाना)
60 यूनिपोल से 2.23 करोड़ रुपये
पेंसिल पोल/साइड होर्डिंग 50 से 60 लाख रुपये
तालाब आरओबी पर लगे कियोस्क से 40 छह लाख रुपये
अलीगढ़ रोड दयानतपुर 60 कियोस्क से तीन लाख रुपये
तालाब से हतीसा तक 300 कियोस्क से छह लाख रुपये
कुल 510 खंबों से 2.98 करोड़ रुपये