संरक्षण के दावों के बीच गोवंश की स्थिति नारकीय बनी हुई है। चारे के नाम पर उन्हें कूड़ा और गंदा पानी नसीब हो रहा है। गोवंश टिनशेड की छांव, पानी और चारे की किल्लत से जूझ रहे हैं। ऐसे में कई गोवंश बीमार हो रहे हैं।
जिले की 39 गोशालाओं में इन दिनों लगभग 12,500 गोवंश संरक्षित हैं, लेकिन इनकी देखरेख के लिए जिम्मेदार पशुपालन विभाग और स्थानीय निकाय अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल साबित हो रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय सिंह यादव ने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों को अपनी गोशालाओं में पेयजल, चारे और टिनशेड की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है, जहां खामियां मिल रहीं हैं उन्हें तत्काल दूर कराया जा रहा है।
1. खुटीपुरी : भगवान भरोसे गोवंश
इस गोशाला में जबरदस्त लापरवाही बरती जा रही है। यहां के 120 गोवंश चारा-पानी और इलाज के अभाव में बीमार हो रहे हैं। मौके पर कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिला। बीते दिनों आई आंधी में टिनशेड उड़ने के बाद से गोवंश धूप में खड़े रहते हैं। केयरटेकर का मानदेय भी बकाया है।
2. पुन्नेर : खराब पंखे और प्यासे गोवंश
यहां 380 गोवंश हैं, लेकिन अव्यवस्थाओं का अंबार है। पंखे खराब होने से गोवंश बेहाल हैं और छोटे गोवंशों के लिए पानी पीने की कोई अलग व्यवस्था नहीं है। टेंडर न होने के कारण हरे चारे का अभाव है और चिकित्सक भी दौरा नहीं करते।
3. कैलोरा : जलभराव और कीचड़
280 गोवंश वाली इस गोशाला का फर्श कच्चा है, जिससे बारिश में कीचड़ और जलभराव हो जाता है। चहारदीवारी न होने से जंगली जानवर गायों को क्षति पहुंचा रहे हैं। बिजली कटौती के कारण पानी की समस्या बनी रहती है और इलाज के अभाव में गोवंश बीमार हैं।
4. सिकंदराराऊ: पेड़ों की छांव और सूखा भूसा
नगर पालिका द्वारा संचालित इस केंद्र में 60 गोवंश हैं। यहां टिनशेड की कमी के कारण गायें पेड़ों के नीचे रहने को मजबूर हैं। आहार के नाम पर केवल सूखा भूसा दिया जा रहा है और पानी की टंकी भी जर्जर अवस्था में है।
5. दरकई : कागजों और जमीनी संख्या में अंतर
यहां कागजों पर 345 गोवंश दर्ज हैं, जबकि मौके पर लगभग 370 ही हैं। टिनशेड के नीचे पंखों की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे भीषण गर्मी में गोवंश की हालात खराब है। गोवंश भीषण गर्मी में बाहर धूप में रहने के लिए मजबूर हैं। यहां केयरटेकर स्टाफ की तैनाती है।
6. जलेसर रोड : कूड़ा चरता है गोवंश
सीवेज फार्म स्थित गोशाला में सफाई की कमी है। यहां 130 में से 30 गायें पास के कूड़े के ढेर से गंदगी खाने को मजबूर हैं। नौ में से केवल पांच केयरटेकर ही मौके पर मिले। चारे के नाम पर केवल पांच क्विंटल चरी ही उपलब्ध हो पा रही है।
7. पराग डेयरी : गंदा पानी और गोदाम खाली
जिले की सबसे बड़ी अस्थायी गोशाला (1265 गोवंश) होने के बावजूद यहां बदहाली है। पानी की हौदियां महीनों से साफ नहीं की गई हैं। चारे का गोदाम खाली पड़ा है। गोवंश केवल दानदाताओं द्वारा भेजे गए चारे या गंदे चारे को खाकर पेट भरने को मजबूर है।
गोशाला में धूप में बैठे गोवंश। संवाद