जिले में व्यावसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति बाधित होने का असर अब होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। कई होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं, जबकि शहर में सुबह लगने वाले कई कचौड़ी-बेड़ई और नाश्ते के कई ठेले भी इन दिनों नजर नहीं आ रहे हैं।
सुबह के समय शहर के विभिन्न चौराहों और बाजारों में लगने वाले कचौड़ी-बेडई और नाश्ते के ठेलों की संख्या भी काफी कम हो गई है। कुछ ढाबा संचालकों ने फिलहाल कोयले की भट्टियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द ही व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो होटल और ढाबों का कारोबार और अधिक प्रभावित हो सकता है।
रेस्टोरेंट संचालक दक्ष अरोरा ने बताया कि हमारे पास सिलिंडर का जो स्टाक है, उससे काम चला रहे हैं। गैस की कमी के कारण हमने छोले भटूरे, पूड़ी, समोसे जैसे कई ऐसे आइटम, जिनमें बार-बार कढ़ाई का तेल गर्म करने के लिए गैस जलानी पड़ती थी, उन्हें बनाना बंद कर दिया है। यही कोशिश है कि जब तक स्थिति सामान्य न हो, सिलिंडर को अधिक से अधिक चलाया जाए।
ढाबा संचालक राहुल कुमार का कहना है कि हमने अब गैस का काम ही खत्म कर दिया है, कोयले की भट्ठी से काम चला रहे हैं, कुछ आइटम हैं जो गैस पर ही पक सकते हैं, उन्हें घर से तैयार कर के ला रहे हैं। अगर ज्यादा दिक्कत हुई तो कुछ दिन ढाबे को बंद करेंगे, इसके अलावा कोई चारा नहीं है।