मानदेय की आस में कार्य करने वाले मनरेगा मजदूरों को पिछले दो माह से मजदूरी के नाम पर फूटी कौड़ी नहीं मिली है। जिले के 1.28 लाख मजदूर मानदेय की बाट जोह रहे हैं। अगर होली से पहले इनको मानदेय नहीं मिला तो इनके लिए त्योहार बदरंग हो सकता है।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले मजदूरों का गांव से पलायन रोकने के लिए उन्हें गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए मनरेगा की शुरुआत की गई थी। इसके तहत काम की मांग करने वाले लोगों को रोजगार मुहैया कराया जाता है। मनरेगा के तहत मजदूरों को प्रतिदिन के हिसाब से 237 रुपये मजदूरी मिलती है। इसका भुगतान शासन द्वारा किया जाता है।
हैरानी की बात यह है कि दिन भर हाड़ तोड़ मेहनत करने के बावजूद मनरेगा मजदूरों को मजदूरी की छोटी रकम भी वक्त पर नहीं मिल पा रही। जिले में वर्तमान में मनरेगा मजदूरों की मजदूरी का करीब 5.80 करोड़ रुपया बकाया है। मजदूर मजदूरी के भुगतान के लिए अब ग्राम प्रधानों के घर व पंचायत सचिवालय के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं।
चिंता की बात तो यह है कि अब से 10 दिन बाद होली का त्योहार है। ऐसे में अगर त्योहार से पहले इन मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ तो वह त्योहार कैसे मना पाएंगे। मजदूरों के दबाव को देखते हुए ग्राम प्रधान भी ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों से लगातार मनरेगा मजदूरों के बकाया के भुगतान के लिए बजट की मांग कर रहे हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा।
ब्लॉक मजदूरों की संख्या धनराशि
सासनी 4220 6901752
हाथरस 5411 7193917
मुरसान 4726 5662186
सादाबाद 6200 9266373
सहपऊ 3442 6873678
सिकंदराराऊ 4758 6748346
हसायन 6980 13444253
कुल 1,28,447 5,80,90,505
जल्द ही मनरेगा मजदूरों का भुगतान करा दिया जाएगा। इस संबंध में शासन को अवगत करा दिया गया है। बजट मिलते ही खातों में धनराशि पहुंच जाएगी।
-राजेश कुरील, उपायुक्त मनरेगा।