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स्वास्थ्य कर्मी की करतूत ने स्वास्थ्य विभाग को किया शर्मसार

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स्वास्थ्य कर्मी की करतूत ने स्वास्थ्य विभाग को किया शर्मसार
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दुष्कर्म के 12 घंटे बाद भी अस्पताल अधीक्षक को नहीं थी घटना की जानकारी
टीबी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती किशोरी के साथ कर दिया व्यभिचार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। जिले के कई सरकारी अस्पतालों के बारे में यह जानकारी तो सामने आती रही है कि वह जुए और शराब के अड्डे बन गए हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल में यदि टीबी के मरीज के साथ उसी अस्पताल का ही कोई कर्मचारी दुष्कर्म कर दे तो इससे ज्यादा शर्मनाक बात क्या होगी।
शुक्रवार की रात्रि में एमडीटीबी अस्पताल में एक स्वास्थ्य कर्मी की करतूत से विभाग के अधिकारी हलाकान और परेशान हैं। पुलिस की पूछताछ में इस अस्पताल और उसके रिकॉर्ड में भी खामियां सामने आई हैं। किशोरी से पूछताछ के हिसाब से वह दो दिन से अस्पताल में दाखिल थीं, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक वह शुक्रवार की दोपहर को ही अस्पताल में दाखिल हुई थी। अस्पताल में किसी जिम्मेदारी अधिकारी के नहीं रहने की बात भी सामने आई।
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जिले के कई सरकारी अस्पतालों के बारे में यह बात समय-समय पर सामने आती रही है कि वहां जुए से लेकर नशेबाजी होती है। अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम रहता है। मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और उनके साथ इलाज में लापरवाही बरती जाती है, लेकिन शुक्रवार की रात्रि में जो कुछ हुआ, उसने यहां मानवता को ही कलंकित कर दिया। टीबी की रोगी एक किशोरी को उसके परिजन बड़ी आशा के साथ यह सोचकर एमडीटीबी अस्पताल लेकर आए थे कि उन्हें इस अस्पताल में समुचित इलाज मिलेगा और किशोरी स्वस्थ हो जाएगी।
किशोरी को अस्पताल में भर्ती भी कर लिया गया, लेकिन जो हुआ, उसके बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। इस अस्पताल में इस किशोरी को क्या उपचार के लिए भर्ती किया गया था या फिर पूरी योजनाबद्ध तरीके से व्यभिचार के लिए भर्ती किया गया था। किशोरी को पूरी योजना के साथ रात्रि में उठाया गया। उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया गया और फिर उसके साथ अस्पताल के ही चिकित्सा अधीक्षक के ऑफिस में वहीं के एक कर्मचारी ने दुष्कर्म किया।
इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि अस्पताल के अधीक्षक को 12 घंटे बाद भी घटना की जानकारी ही नहीं हुई। उन्हें हाथरस गेट कोतवाली पुलिस ने पहुंचकर बताया कि इस अस्पताल में दुष्कर्म की घटना हुई है और उस ऑफिस में हुई है, जहां वह बैठे हैं। घटना की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक में खलबली मच गई। कई कर्मियों की पुलिस ने हिरासत में ले लिया और उसने पूछताछ की। शुक्रवार की रात्रि में इस अस्पताल में 13 मरीज दाखिल थे। इन मरीजों ने पूछताछ में यह बताया कि यह कर्मचारी किशोरी को इंजेक्शन के बहाने नीचे ले गया था। किशोरी के परिजनों और किशोरी का कहना था कि वह दो दिन पहले से अस्पताल में दाखिल हैं, लेकिन अस्पताल के रिकॉर्ड के हिसाब से वह शुक्रवार को ही दिन में दाखिल हुई थी। पुलिस पूरे मामले में अभी छानबीन में जुटी है।
सफाई कर्मी ने उपलब्ध कराई चाभी
हाथरस। पुलिस ने जब अस्पताल में पहुंचकर अस्पताल के अधीक्षक से पूछताछ की और पता किया कि आखिर उनके कक्ष की चाभी कैसे इन कर्मियों तक पहुंच गई तो यह बात सामने आई कि इस घटना में सहयोगी सफाई कर्मचारी पर ही चाभी रहती थी और उसने ही रात्रि में आरोपी वार्ड बॉय को चाभी दी। तब उसने वहां घटना को अंजाम दिया।
तो बाजार से लाया था बेहोशी का इंजेक्शन
हाथरस। अस्पताल के अन्य कर्मियों का यह भी कहना था कि अस्पताल में मरीज को ऐसा कोई इंजेक्शन नहीं दिया जाता, जिससे उसे बेहोशी आए। इससे यह बात भी स्पष्ट है कि यह कर्मी बाहर से ही यह इंजेक्शन लाया और पीड़िता को इसकी डोज दी।
एमडीटीबी अस्पताल के शानदार इतिहास को किया कलंकित
हाथरस। मटरूमल धन्नालाल टीबी अस्पताल का इतिहास बेहद शानदार रहा है। जब टीबी एक असाध्य बीमारी थी और आसपास के इलाके में टीबी का उपचार संभव नहीं था। तब शहर के एक समाजसेवी परिवार ने इस अस्पताल का निर्माण कराया था। इस अस्पताल का उद्घाटन करने के लिए प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद 31 मई 1958 को यहां आए थे। इससे पहले प्रदेश के तत्कालीन उद्योग, नियोजन, स्वास्थ्य मंत्री चंद्रभानु गुप्त ने 26 अक्तूबर 1955 को इसका शिलान्यास किया था। गुप्त बाद में यूपी के मुख्यमंत्री भी रहे थे। लाखों रोगियों को टीबी से मुक्त करने का जरिया बना यह अस्पताल इस तरह कलंकित हो जाएगा, इस बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था।
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इस घटना की जानकारी मुझे अभी पुलिस से ही हुई है। यह घटना बेहद निंदनीय है। अस्पताल में किसी तरह की कोई अव्यवस्था नहीं है। रात्रि में इस कर्मचारी शिवनंदन की ड्यूटी थी। उसके साथ एक एजेंसी का कर्मचारी विशाल भी ड्यूटी पर था। अस्पताल में फुल टाइम चिकित्सक की तैनाती नहीं रहती है। रात्रि में मेरे ऑफिस की चाभी भी सफाई कर्मी पर ही थी। सफाई आदि के मकसद से चाभियां यहीं के कर्मी पर रहती हैं। पुलिस जब कार्रवाई करेगी तो तत्काल मैं भी अपनी रिपोर्ट सीएमओ को भेज दूंगा।
-डॉ. बिजेंद्र सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, एमडीटीबी अस्पताल।
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