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Hathras News: जीआई टैग मिलने से और महकेगा हाथरस का हींग उद्योग

Thu, 06 Apr 2023 01:52 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
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हाथरस की हींग को अब जीआई टैग मिल गया है। हाथरस के हसायन के गुलाब जल और गुलकंद को पहले ही जीआई टैग मिल चुका है। यह टैग मिलने के बाद हाथरस का हींग उद्योग और ज्यादा महक सकेगा। हालांकि यह भी माना जा रहा है कि इससे हींग की कीमत में इजाफा होगा। बहरहाल, जीआई टैग मिलने से उद्यमी काफी खुश हैं। उद्यमियों का कहना है कि इससे यह उद्योग और ज्यादा फलेगा-फूलेगा और हाथरस की हींग के नाम से फेक प्रोडक्ट पर भी लगाम लगेगी।
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प्रदेश के कुछ उत्पादों को जीआई टैग मिला है। इसमें हाथरस की हींग भी शामिल है। इसे भौगोलिक संकेतक मिल गया है। किसी भी रीजन का जो क्षेत्रीय उत्पाद होता है, उससे उस क्षेत्र की पहचान होती है। उस उत्पाद की ख्याति जब देश दुनिया में फैलती है तो उसे प्रमाणित करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसे जीआई टैग यानि जिओ ग्राफिकर इंडिकेटर कहते हैं। इसे हिंदी में भौगोलिक संकेतक के नाम से जाना जाता है। जीआई टैग से उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलता है। जीआई टैग किसी उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता का पैमाना भी माना जाता है। इससे उस उत्पाद के लिए बाजार आसानी से तैयार हो जाता है। वैसे भी हाथरस की रत्ती भर हींग खाने का जायका बदल देती है। हाथरस की हींग की महक दूर-दूर तक है। चार साल पहले इसे ओडीओपी में शामिल किया जा चुका है। अब इसे जीओ टैग भी मिल गया है। इससे यहां के उद्यमी काफी खुश हैं।
150 फैक्टरियां है हींग की, विदेशों से आता है कच्चा माल
यदि हाथरस के हींग उद्योग पर एक नजर डालें तो हाथरस में हींग की करीब 50 बड़ी और 100 छोटी फैक्टरी हैं। इस उद्योग से करीब 10 हजार लोग जुड़े हैं। यहां करीब 25 से 30 करोड़ रुपये का इस उद्योग का सालाना टर्न ओवर है। मार्केट में पांच हजार रुपये किलो से लेकर 28 हजार रुपये किलो तक की कीमत की हींग उपलब्ध है। हींग का कच्चा माल यहां अफगानिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि मुल्कों से आता है। इन देशोंं में हींग का दूध (एसफोइटीडा) मिलता है। वह दिल्ली और मुंबई के व्यापारियों के माध्यम से यहां आता है। उसके बाद यहां प्रोसेसिंग कर हींग तैयार की जाती है और उसके बाद उसकी दूर-दूर तक आपूर्ति होती है।
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तो बढ़ सकते हैं हींग के दाम
जिस तरह से हाथरस की हींग को जीआई टैग मिला है, उससे यह भी माना जा रहा है कि हींग के दाम और बढ़ जाएगे। हींग का निर्यात बढ़ जाएगा। हाल मेंं ही हसायन के गुलाब जल और गुलकंद को जीआई टैग मिला था तो गुलाब से निर्मित उत्पादो की कीमतों में काफी इजाफा हुआ था। अब हींग की कीमतों में भी उछाल आ सकता है।
जिले में नहीं है हींग की जांच के लिए प्रयोगशाला
यहां की हींग की महक देश-विदेश तक है। खेदजनक पहलू यह है कि शहर में हींग की गुणवत्ता की जांच नहीं हो रही है। हींग को प्रदेश सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद में भी शामिल कर लिया। हींग उद्यमियों की सोसायटी बन गई है। इसके बाद भी अभी तक हींग की प्रयोगशाला के लिए जगह नहीं मिली सकी है। इस कारण हींग को तैयार करने के बाद उसकी गुणवत्ता जांच के लिए उद्यमियों को आगरा, दिल्ली, अहमदाबाद जाना पड़ता है।
हींग का उद्योग यहां काफी पुराना है। यहां की हींग काफी मशहूर भी है। हाथरस को हींग की नगरी के रूप में जाना भी जाता है। अब इसे जीआई टैग भी मिल गया है। इससे इस उद्योग की ख्याति और फैलेगी। यहां पर्यटन भी बढ़ेगा और यह उद्योग भी। इस उद्योग को कानूनी संरक्षण भी मिलेगा। -मनोज अग्रवाल, हींग उद्यमी
हाथरस की हींग को जीआई टैग मिल गया है। वैसे भी हाथरस की पहचान यहां की हींग से है। अब इसे भौगोलिक संकेतक भी मिल गया है। इससे इस उद्योग को कानूनी संरक्षण भी मिलेगा। यहां के हींग उद्योग का और ज्यादा विकास होगा। -कृष्णा गर्ग, हींग उद्यमी
आज हाथरस में हींग का कार्य करने वालों के लिए खुशी का दिन है। हाथरस की हींग को जीआई टैग मिला है। इससे हाथरस की हींग के नाम से बाहर कोई हींग का उत्पादन नहीं कर सकेगा। नकली उत्पाद पर लगाम लगेगी। हींग का उद्योग यहां और ज्यादा तरक्की करेगा। - पंंकज अग्रवाल, हींग उद्यमी
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