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हाथरस : कांटे की लड़ाई में कौन मारेगा बाजी

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मनोज माहेश्वरी
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हाथरस। जाट लैंड सादाबाद विधानसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा ने जहां पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय को मैदान में उतारा है तो वहीं राष्ट्रीय लोकदल और बसपा की कोशिश रामवीर उपाध्याय का विजय रथ रोकने की है। यह चुनाव पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय का कद भी तय करेगा। भाजपा को उम्मीद है कि रामवीर जैसे कद्दावर नेता के दम पर योगी, मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर इस सीट से इस बार उसे जीत मिल जाएगी। रालोद यह आस लगाए बैठा है कि जाट बहुल इस सीट पर उसे परंपरागत वोटरों के साथ सपा के गठबंधन का भी लाभ मिलेगा। बसपा फिर अपने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को लेकर मैदान में है।
जाट बहुल सादाबाद सीट पर कई बार गैर जाट बिरादरी के उम्मीदवार भी परचम लहराते रहे हैं। वर्ष 2017 में इस सीट पर बसपा के उम्मीदवार रामवीर उपाध्याय ने जीत हासिल की थी। तब भाजपा की प्रदेश भर में पिछले चुनाव में सुनामी चली थी। इसके बावजूद पूरे अलीगढ़ मंडल में यही सीट भाजपा नहीं जीत पाई थी। इस सीट पर जीत हासिल कर रामवीर उपाध्याय ने फिर अपना वर्चस्व साबित कर दिया था। रामवीर उपाध्याय जिले की तीनों सीटों से विधायक चुने जा चुके हैं और लगातार पांच बार से विधायक हैं। वह बसपा की सरकार में कई बार कबीना मंत्री रहे हैं। रामवीर ने कई बार विपरीत परिस्थितियों में अपना परचम लहराया है और हर वर्ग में उनकी पैंठ भी है। बसपा ने दो साल पहले उनका निलंबन कर दिया था। ऐसे में भाजपा ने उन्हें अपने खेमे में शामिल कर लिया और अस्वस्थ होने के बावजूद रामवीर उपाध्याय को ही सादाबाद सीट पर उम्मीदवार बनाया है।
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भाजपा को यह आशा है कि रामवीर उपाध्याय इस बार उसे इस सीट पर जीत दिला देंगे। रामवीर उपाध्याय को पिछली बार स्वजातीय मतदाताओं के अलावा बसपा का कैडर वोट मिला था। भाजपा को इस बार आशा है कि रामवीर के कद का लाभ उसे मिलेगा और साथ ही मतों का ध्रुवीकरण होगा। रामवीर के कद के साथ साथ योगी, मोदी और राष्ट्रवाद के नाम पर उसे इस बार हर वर्ग का वोट मिलेगा और इस सीट पर उसे जीत हासिल होगी। बसपा ने इस बार फिर ब्राह्मण चेहरे पर दांव खेला है। इस बार बसपा ने डॉ. अविन शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। बसपा को उम्मीद है कि बसपा का कैडर वोट और ब्राह्मण मतदाताओं के अलावा मुस्लिम वोट भी उसके खाते में जाएगा और यह सीट फिर बसपा जीत जाएगी।
वहीं सपा-रालोद गठबंधन के तहत यह सीट रालोद के खाते में गई है। जाट बहुल सादाबाद से रालोद ने प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है। हाल में ही प्रदीप और उनकी पत्नी ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता है। रालोद को उम्मीद है कि एकजुट होकर जाट मतदाता तो उसे वोट देगा ही, साथ ही सपा गठबंधन के तहत उसे सपा का परंपरागत वोट भी मिलेगा। ऐसे में इस सीट पर रालोद जीत हासिल कर लेगा। वहीं कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग के मथुरा प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है और वह भी जीत के लिए लगा रहे हैं।
फिलहाल इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा को जहां ध्रुवीकरण की उम्मीद है तो बसपा और रालोद को जातीय समीकरणों से जीत की आस है। बात यदि क्षेत्र की समस्याओं की करें तो मुरसान के रहने वाले संजय चौहान का कहना है कि कानून व्यवस्था तो इस सरकार में ठीक है, लेकिन स्थानीय समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है। कई सड़कें नहीं बनी हैं। गांव कटैला निवासी शिवदयाल सिंह का कहना है कि आवारा गोवंश सबसे बड़ी समस्या है। इससे खेती को काफी नुकसान हो रहा है। गांव नगला पचौरी के शिवनारायण पचौरी सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि कानून व्यवस्था मजबूत हुई है और जरूरतमंदों को राशन भी मिल रहा है। धाधऊ के रहने वाले साहब सिंह का कहना है कि किसानों की इस सरकार में कोई सुनवाई नहीं हुई। गढ़ी हरिया के सुखवीर सिंह का कहना है कि आवारा गोवंश तो खेती को नुकसान पहुंचा ही रहे हैं। साथ ही खारे पानी की समस्या से भी लोगों को निजात नहीं मिली। संवाद
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सादाबाद विधानसभा सीट मतदाता
पुरुष मतदाता - 2,01,084
महिला मतदाता - 1,72,134
कुल मतदाता - 3,73,235
वर्ष 2017 का परिणाम
रामवीर उपाध्याय (बसपा) 91,365
डॉ. अनिल चौधरी (रालोद) 64,775
प्रीति चौधरी (भाजपा) 36,134
देवेंद्र अग्रवाल (सपा) 29,060
अनुमानित जातिगत आंकड़े
जाट - 1,00,000
ब्राह्मण - 60,000
मुस्लिम - 20,000
दलित - 70,000
ठाकुर - 20,000
बघेल - 20,000
वैश्य - 10,000
यादव - 10,000
प्रमुख मुद्दे
आवारा गोवंश, खारे पानी की समस्या, बदहाल सड़कें, आलू प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित न होना, क्षेत्र का घुंघरू उद्योग विकसित न होना।
रामवीर के परिजनों ने संभाल रखी है चुनाव की कमान
हाथरस। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय कई महीने से अस्वस्थ हैं। हालांकि क्षेत्र में वह अब दिखाई भी दिए हैं। उनकी गैरमौजूदगी में उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय, भाई विनोद उपाध्याय, रामेश्वर उपाध्याय और पुत्र चिराग उपाध्याय ने चुनाव की कमान संभाल रखी है। रामवीर उपाध्याय द्वारा कराए गए विकास कार्यों का हवाला भी उनके समर्थक प्रचार के दौरान दे रहे हैं। परिजनों का कहना है कि रामवीर उपाध्याय के स्वास्थ्य में काफी सुधार है। संवाद
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