न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पिछले कई महीनों से क्षय रोगी अपने उपचार और जांच के लिए काफी परेशान है। उन्हें कई घंटे इंतजार के बाद भी न उपचार मिल रहा और न ही जांचें हो रही हैं। मंगलवार को भी कई मरीज अस्पताल परिसर में इधर से उधर भटकते देखे गए। मरीजों का कहना था कि कोरोना से निपटना भी जरूरी है, लेकिन टीबी के मरीजों के इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
हाथरस शहर में 70 साल पहले टीबी के मरीजों के लिए एमडीटीबी अस्पताल स्थापित किया गया था। इस सरकारी अस्पताल में टीबी के मरीजों की जांच होती है। मरीजों को भर्ती करने की भी व्यवस्था है और यहां उनकी पर्याप्त जांच व उपचार भी होता है। यहां औसतन 100 लोग ओपीडी में रोजाना अपना उपचार कराने के लिए आते हैं। कोरोना में इस अस्पताल को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया। यहां की ओपीडी भी बंद कर दी गई। हालांकि दूसरी लहर थमने के बाद टीबी अस्पताल को फिर से चालू कर दिया गया।
जब कोरोना की तीसरी लहर से फिर हालात बिगड़ने लगे तो इस अस्पताल को फिर कोविड अस्पताल घोषित कर दिया और यहां टीबी रोगियों के लिए ओपीडी भी बंद कर दी गई। यहां आने वाले टीबी रोगियों को यहां से बागला जिला अस्पताल भेजा जाने लगा और वहां के पर्चे पर इनसे इलाज के लिए कहा जाने लगा, लेकिन बागला जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सक काफी कम हैं और इस टीबी अस्पताल की ओपीडी बंद है। ऐसे में टीबी के मरीजों को उपचार के लिए इधर से उधर भटकना पड़ रहा है और उनकी जांच भी नहीं हो रही।
टीबी का रोग बताया गया है और उपचार कराने के लिए आई हूं, लेकिन यहां ओपीडी बंद होने की बात कही जा रही है। यहां से जिला अस्पताल भेजा गया, लेकिन वहां भी चिकित्सक नहीं मिले। इसकी वजह से काफी परेशान हूं।
-मयसर निवासी लाला का नगला, हाथरस।
अपना उपचार कराने के लिए आई हूं। यहां से यह कह दिया गया कि यह अस्पताल केवल कोरोना के मरीजों के लिए है। कोरोना से बचाव बेहद जरूरी है और उसके निपटने के लिए यह अस्पताल कोविड अस्पताल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है लेकिन टीबी की मरीजों को भी पूर्व की तरह पर्याप्त उपचार की व्यवस्था की जाए। यहां से जिला अस्पताल लाने के लिए कह दिया जाता है लेकिन वहां भी हमें उपचार नहीं मिलता।
-रूमा निवासी नाई का नगला, हाथरस
इस अस्पताल को कोविड अस्पताल में तब्दील किया जा चुका है। टीबी के मरीजों को भी निर्धारित स्थान पर पर्याप्त उपचार मिल रहा है। वैसे टीबी के मरीजों के लिए यहां ओपीडी फिर से संचालित करने की बात अधिकारियों के संज्ञान में डाल चुका हूं। शासन के आदेश के बाद ही यह निर्णय लिया जाएगा कि यहां टीबी के मरीजों का उपचार होगा या नहीं।
-डॉ. बिजेंद्र सिंह, चिकित्साधीक्षक, एमडीटीबी अस्पताल, हाथरस
दो माह से खाली पड़ा है यह अस्पताल
हाथरस। उल्लेखनीय है कि इस कोविड अस्पताल में आज तक कोई बच्चा भर्ती नहीं हुआ और तीसरी लहर में केवल दो मरीज ही भर्ती हुए। पिछले करीब दो माह से इस कोविड अस्पताल में कोरोना का कोई मरीज भर्ती नहीं है और टीबी के मरीजों के लिए यह अस्पताल बंद है। ऐसे में दो माह में यह अस्पताल खाली पड़ा है। हालांकि अधिकारियों का यह कहना है कि शासन के निर्देश पर यह व्यवस्थाएं कर रखी हैं और शासन के निर्देश पर ही यह कोविड अस्पताल बना हुआ है। संवाद