हाथरस डिपो से शुरू की गई रेवाड़ी की बस सेवा घाटे की भेंट चढ़ गई। लगातार आर्थिक नुकसान उठाने के बाद डिपो प्रबंधन ने इस बस सेवा को बंद करने का निर्णय लिया है।
करीब आठ माह पूर्व यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बस सेवा की शुरुआत की गई थी, लेकिन अपेक्षित यात्रियों की संख्या न मिलने के कारण यह सेवा सफल नहीं हो सकी। डिपो अधिकारियों ने बताया कि बस सेवा के असफल होने का सबसे बड़ा कारण राजस्थान सरकार द्वारा महिला यात्रियों को दी जा रही आधे किराये की सुविधा है।
रेवाड़ी से हाथरस की ओर लौटते समय अधिकांश महिला यात्री राजस्थान रोडवेज की बसों में सफर करना ज्यादा पसंद कर रहीं हैं, जिससे हाथरस डिपो की बस में सवारियों की कमी हो गई। कई बार बस लगभग खाली ही लौट रहीं थीं, जिससे लोड फैक्टर प्रभावित हो रहा था। लगातार घाटे के चलते डिपो ने आर्थिक स्थिति का आकलन किया और अंतत: इस बस सेवा को बंद करने का फैसला लिया।
गौरतलब है कि हाथरस में कांस्यकार समाज की अच्छी-खासी संख्या है। इस समाज के लोगों का रेवाड़ी से गहरा रिश्ता है। उन्हें अब सीधी सेवा का लाभ नहीं मिल सकेगा। रेवाड़ी तक पहुंचने के लिए उन्हें मथुरा या आगरा से ट्रेन या दूसरे साधनों का सहारा लेना होगा। हाथरस डिपो के प्रभारी मंगेश कुमार ने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच घाटे में बसों का संचालन जारी रखना संभव नहीं है, इसलिए नुकसान से बचने के लिए यह कदम उठाना पड़ा।