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हाथरस : टीकाराम पुजारी और उनके परिवार ने लड़ी थी आजादी की जंग

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हाथरस : टीकाराम पुजारी का फाइल फोटो। संवाद - फोटो : SADABAD
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अशोक वार्ष्णेय
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सादाबाद। अंग्रेजी हुकूमत से जब पूरा देश आजादी के लिए लड़ रहा था, तब सादाबाद ने भी इस महायज्ञ में आहुुतियां दीं। क्षेत्र के कई स्वतंत्रता सेनानियों ने कदम-कदम पर अंग्रेजों के जुल्म का सामना किया, वे फिर भी नहीं झुके। बेशक उनका शौर्य इतिहास की दीवारों पर अमिट लेख हो, लेकिन युवा पीढ़ी उनकी यादें भी नहीं सहेज सकी। आज हमारा समाज भी उन्हें भुला बैठा है। क्षेत्र के गांव ऊंचागांव निवासी टीकाराम पुजारी, एक ऐसे शख्स थे, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता की खातिर न जाने कितनी यातनाएं झेलीं और शहीद हो गए। संवाद
कई बार गए थे जेल
सादाबाद। जब देशवासियों में अंग्रेजी शासन से आजाद होने की ज्वाला उग्र हो रही थी तो उस समय क्षेत्र के ग्राम ऊंचागांव रसमई (मथुरा) निवासी टीकाराम पुजारी सत्याग्रह आंदोलन में कूद पड़े। उन्होंने 1930 में छह माह और सन 1932 में एक वर्ष कैद की सजा पाई थी। व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण सन 1941 में एक वर्ष कैद और 200 रुपये जुर्माने की सजा पाई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सन 1942 में नजरबंद किए गए। टीकाराम पुजारी वर्ष 1957 में सादाबाद क्षेत्र के विधायक भी रहे थे। उनकी आखिरी इच्छा यही थी कि उनके परिवार को राष्ट्रीय परिवार घोषित किया जाए। आश्चर्यजनक पहलू तो यह है कि टीकाराम पुजारी के परिवार में से ही 10 और सदस्य स्वतंत्रता सेनानी रहे। संवाद
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पुत्रवधू को मिला था छह माह का कारावास
सादाबाद। टीकाराम पुजारी की पुत्रवधू हरभेजी पुजारी को सविनय आज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण वर्ष 1932 में छह महीने का कारावास मिला था। इसके अलावा टीकाराम पुजारी की पुत्री कलावती, पुत्र बाबूलाल शर्मा और हरिबल्लभ पुजारी पुत्र गंगाराम पुजारी ने भी सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया और अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अपने प्राणों की आहुतियां दे दी। संवाद
बेटे बोलीं, पिता के नाम पर हो पीएचसी का नाम
सादाबाद। स्वर्गीय टीकाराम पुजारी के पौत्र नरेंद्र कुमार पुजारी ने डीएम और सीएमओ से मांग की है कि ऊंचागांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का नाम स्व. विधायक टीकाराम पुजारी के नाम पर किया जाए, ताकि उनकी पहचान लोगों के बीच बनी रहे। संवाद
इन लोगों ने भी दिया था बलिदान
सादाबाद। टीकाराम पुजारी के अलावा गांव सुसाइन ऊंचागांव के रोशनलाल आर्य पुत्र चतुरी सिंह, नंद किशोर गौतम ने पूर्व में हैदराबाद राज्य में आर्य समाज आंदोलन में भाग लेने के कारण 1938-39 में एक-एक साल का कारावास भोगा था। कुंवरसेन पुत्र शोभाराम के व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण 1941 में एक वर्ष की कैद और 10 रुपये जुर्माने की सजा पाई थी। डालचंद्र कुशवाहा ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण 1932 में छह माह कारावास की सजा पाई थी। बिहारी सिंह पुत्र तुलाराम ने सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने कारण एक साल की जेल और 10 रुपये जुर्माने की सजा पाई थी। इसके अलावा लौहरे सिंह, भंवर सिंह और भूप सिंह ने भी आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया था। संवाद
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टीकाराम पुजारी के परिवार का इतिहास
-टीकाराम पुजारी की पत्नी खेम कुमारी ने भी वर्ष 1932 में सविन अवज्ञा आंदोलन में भाग लिया था। आंदोलन में भाग लेने की वजह उन्हें से तीन महीने के कारावास और 25 रुपये जुर्माने की सजा मिली थी।
-भाई गिरिवरदास को भी व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण वर्ष 1941 में एक वर्ष की जेल और 100 रुपये का जुर्माने की सजा मिली।
- मुंशी पुजारी पुत्री टीकाराम पुजारी ने वर्ष 1933 में छह माह के कारावास की सजा पाई थी।
- टीकाराम पुजारी के परिवार के ही सदस्य नारायण प्रसाद पुजारी को सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण वर्ष 1932 में कारावास का दंड मिला था।
- टीकाराम पुजारी के बेटे मुंशीलाल पुजारी को भी सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण वर्ष 1933 में छह माह के लिए कारावास की सजा हुई थी।
- टीकाराम पुजारी के भाई चंदला पुत्र उद्योदास ने भी 1932 में सजा पाई थी।
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