हाथरस: आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
इस वर्ष पितृ पक्ष और नवरात्र के बीच में अधिकमास होने के कारण दोनों में एक महीने का अंतर होगा। अश्विन मास में अधिक मास (मलमास) लगना और एक महीने के अंतर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। ऐसा संयोग करीब 19 वर्षों बाद बन रहा है। वैसे हर वर्ष पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ होते थे। इस साल ऐसा नहीं होगा। इस पर पितृपक्ष समाप्ति के बाद अधिकमास लग जाएगा। इस कारण 17 अक्तूबर से नवरात्र की शुरुआत होगी।
आचार्य सुरेंद्रनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि चतुर्मास जो हमेशा चार माह का होता है, इस बार पांच माह का होगा। इस बार अधिक मास अश्विन मास के बाद आ रहा है। इस वर्ष दो अश्विन मास होंगे। ये मास पितृ पक्ष के बाद प्रारंभ होगा। 30 दिनों तक रहेगा। ऐसा संयोग 19 साल बाद बन रहा है। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में सभी व्रत, आस्था मेले, मुहूर्त ग्रहों पर आधारित होते हैं। सूर्य, चंद्र के द्वारा हिंदी माह का निर्माण होता है। 30 तिथियों का माह होता है, जिसमें 15 दिनों बाद अमावस्या और 15 दिनों बाद बाद पूर्णिमा होती है। इन माह में पूरे वर्ष ये तिथियां घटती-बढ़ती रहती हैं। तीन वर्षों के उपरांत इन घटी-बढ़ी तिथियाें से एक पूरे माह का निर्माण होता है।
अधिकमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। पितृ पक्ष में कोई मुहूर्त नहीं होता है। अधिकमास में भी कोई मुहूर्त नहीं होगा, जो लोग नवरात्रि में नई दुकान, घर, वाहन या कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने की सोच रहे हैं। उन्हें अभी और इंतजार करना होगा। उन्होंने बताया कि सबसे पहले वर्ष 1942 में ऐसा संयोग बना था। इसके बाद वर्ष 1982 और फिर वर्ष 2001 में भी दो अश्विन मास आए थे। अश्विन माह इस कारण 17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू होगा।