न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहपऊ (हाथरस)।
गांव थरौरा में पंचायत चुनाव के मतदान के दौरान हिरासत में लिए गए युवक की मौत की अफवाह पर कोतवाली सहपऊ और कस्बा सहपऊ के अलावा गांव थरौरा में देर रात तक बवाल चलता रहा। आक्रोशित लोगों ने जमकर पथराव और तोडफोड़ की। पुलिस कर्मियों के आवासों पर भी पथराव किया गया। बवाल में कई पुलिस कर्मी घायल हुए हैं। डीएम और एसपी कई घंटे तक सहपऊ कोतवाली में डेरा जमाए रहे। बाद में डीआईजी अलीगढ़ ने भी कोतवाली पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। बवाल में लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। हालात संभालने के लिए पुलिस अधिकारी पूरी रात चकरघिन्नी बने रहे। इधर, इधर पुलिस की पिटाई से घायल युवक की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। घायल पुलिसकर्मियों ने भी अपना उपचार कराया है।
गौरतलब है कि बृहस्पतिवार को पंचायत चुनाव के मतदान के दौरान पुलिस ने क्षेत्र के गांव सल्हैपुर चंदवारा, चौबारा, खोंड़ा, चमरपुरा और परसौरा से तीन युवकों को हिरासत में लिया था। इनमें गांव थरौरा के प्रधान पद के प्रत्याशी के भाई बड्ढा पुत्र नेत्रपाल निवासी गारऊ भी शामिल था। इस युवक को एसडीएम सादाबाद और एटा के सीओ ने फर्जी मतदान करने और मतदान में व्यवधान पैदा करने के आरोप में हिरासत में लिया था।
आरोप है कि जब उसने पुलिस के साथ अभद्रता की तो एक पुलिसकर्मी ने उसकी पिटाई कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी का नवरात्रि का उपवास था। कोतवाली पहुंचने पर पुलिस ने उसका मेडिकल कराया। तब तक तो सब ठीक था। इस गांव में मतदान के लिए रात सात बजे तक मतदान चला। मतदान समाप्त होने के बाद हिरासत में लिए गए इन तीनों युवकों को छुड़ाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण कोतवाली पहुंच गए और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
जब भीड़ नारे लगा रही थी, उस समय कोतवाली पर केवल हेड कांस्टेबल मौजूद था। ग्रामीणों ने इलाज कराने के बहाने इस युवक को जबरन कोतवाली से उठा लिया और गाड़ी डालकर ले गए। थोड़ी देर बाद किसी ने लोगों को युवक के मर जाने की झूठी सूचना दे दी। इसके बाद वहां भीड़ का आक्रोश फूट पड़ा। भीड़ कोतवाली पर टूट पड़ी। भीड़ ने वहां खड़ी गाड़ियाें और बाहर पुलिस के लिए लगे टेंट एवं कुर्सियाें में तोड़फोड़ और पथराव शुरू कर दिया।
पथराव शुरू होते ही कार्यालय में बैठे हेड कांस्टेबल जब बाहर निकले तो भीड़ उनको भी पकड़ने दौड़ पड़ी। हेड कांस्टेबल ने भागकर कार्यालय का गेट बंद कर दिया। भीड़ ने कार्यालय के दरवाजे को पत्थर मारकर तोड़ने की कोशिश की। थोड़ी देर बाद जब वहां से कुछ भीड़ कम हो गई और कस्बे के लोग घटना को देखने के लिए छत पर जमा हो गए तो भीड़ ने उन पर भी पथराव शुरू कर दिया। मौका पाकर हेड कांस्टेबल कार्यालय से जान बचाकर भाग गए। उसी समय हिरासत में लिए गए युवकों को भी भागने का मौका मिल गया। इस बीच एक फायर ब्रिगेड कर्मी भीड़ से बचने के लिए दौड़कर कोतवाली में पहुंचा तो भीड़ ने उसे पकड़ लिया और उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी, जिससे वह लहूलुहान हो गया। इधर, चुनाव ड्यूटी कर लौट रहे एक एसआई एवं होमगार्ड भी भीड़ की पिटाई के शिकार हो गए और घायल हो गए।
भीड़ ने मीडिया कर्मियों को भी घेरना शुरू कर दिया। मीडिया कर्मियों ने किसी तरह कोतवाली से भागकर अपनी जान बचाई। करीब दो घंटे तक कोतवाली पर उपद्रवियों का कब्जा रहा। उपद्रवियों ने कोतवाली में लगे सीसीटीवी कैमरों की पूरी केबल को तोड़ दिया एवं डीबीसी को भी नष्ट कर दिया। जिले के अन्य थानों के अलावा आसपास के जिलों से भी पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। तब जाकर उपद्रवी वहां से हटे।
इसके बाद गांव की महिलाएं हाथों र्में इंट-पत्थर लेकर कोतवाली पहुंच गईं, लेकिन भारी पुलिस बल को देखकर एवं उनके मना करने पर वह गांव लौट गईं। रात में कोतवाली पर पहुंचे डीएम एवं एसपी ने विरोध कर रहे लोगों में से कुछ को कोतवाली पर बुलाकर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कहा। इधर, शुक्रवार की सुबह सीओ सादाबाद ब्रह्म सिंह ने जिले के अन्य थानों के पुलिस बल को भी कोतवाली पर बुला लिया। सीओ ने गांव थरौरा के दोनों पक्षों के लोगों को बुलाकर गांव और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद सीओ पुलिस बल के साथ गांव में भ्रमण कर लोगों से शांति बनाए रखने की अपनी की।
थरौरा में भी हुई पत्थरबाजी, रात भर दहशत में रहे लोग
सहपऊ।कोतवाली में हंगामा करने के बाद भीड़ गांव थरौरा में पहुंच गई और विरोध में चुनाव लड़ रहे प्रधान प्रत्याशी, उसके चाचा और समर्थकों के घरों एवं मोहल्लो में पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। उपद्रवी रात डेढ़ बजे तक हाथों में लाठी-डंडे लेकर घूमते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने रात में अधिकारियों को कई बार हंगामा एवं पत्थरबाजी होने की सूचना दी थी, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। उन्होंने पूरी रात दहशत में गुजारी। इधर, कस्बा सहपऊ के लोग भी दो घंटे तक दहशत में रहे। लोगों का लाखों का नुकसान किया था । कस्बे में भी कुछ लोग घायल हुए हैं लेकिन वह सामने नही आ रहे। उनका कहना है कि वर्ष 2004 में भी कुछ लोगों ने सांसद के चुनाव के दौरान रात को कस्बे में हंगामा किया था और लाखों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।