फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों से पारिवारिक लाभ योजना का लाभ लेने की जुगत
जांच में एक ही गांव के निकले 21 फर्जी आवेदक
डीएम ने संबंधित एसडीएम से मांगी जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई के लिए आख्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर योजना का लाभ लेने की कोशिश किए जाने का मामला सामने आया है। समाज कल्याण विभाग द्वारा आवेदनों पर संदेह होने पर जांच किए जाने पर 22 आवेदक फर्जी पाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सभी आवेदक एक की गांव पोरा के रहने वाले हैं। संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी ने जांच में कहा है कि मृत्यु प्रमाण पत्रों पर उनके हस्ताक्षर नहीं किए हैं। अब इस मामले में संबंधित तहसीलों के एसडीएम से आख्या मांगी गई है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। वहीं इस मामले में कई अधिकारियों की गर्दन फंसती जा रही है।
शासन के निर्देश पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत गरीब परिवारों को मुखिया की मौत के दौरान लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत परिवार के मुखिया की मृत्यु होने की दशा में मृतक की पत्नी को एक साल के अंदर इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
इस वित्तीय वर्ष में 22 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर आवेदकों ने लाभ पाने के लिए आवेदन किया है। इस ऑनलाइन आवेदन प्राप्त होने के बाद लेखपालों ने स्थलीय सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट भी आवेदककर्ता के अनुसार दी। सभी तहसीलों से इस योजना के तहत आवेदन एकत्रित होकर समाज कल्याण विभाग पहुंचे। इस विभाग में आवेदन पहुंचने पर जिला समाज कल्याण अधिकारी शिव कुमार आवेदनों में लगी रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में गड़बड़ी की आशंका लगी।
इस आधार पर दो सुपरवाइजरों की टीम इन आवेदनों की जांच के लिए गठित की गई। इस टीम ने जांच में पाया कि तहसील सिकंदराराऊ के गांव पोरा में 21 आवेदकों ने फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर आवेदन किया है और लेखपाल ने स्थलीय निरीक्षण में भी गंभीरता नहीं बरती है। जब मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी होने की बात सामने आई तो ग्राम पंचायत अधिकारी ने जांच अधिकारियों को बताया कि उनके द्वारा यह मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं और इन प्रमाण पत्रों पर जो हस्ताक्षर किए गए हैं, वह भी फर्जी हैं। ऐसा ही हाल सादाबाद तहसील का भी है, लेकिन यहां जांच में एक आवेदक अपात्र पाया गया है।
यह है योजना का लाभ लेने की शर्तें
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत उन महिलाओं को सरकार की ओर से मदद मुहैया कराई जाती है, जिनके पति की मृत्यु हो गई होती है। इस योजना का लाभ पति की मृत्यु के एक साल के भीतर आवेदन किए जाने पर ही लाभ दिए जाने प्रावधान है। एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने की स्थिति में आवेदकों को अपात्र माना जाता है। इस योजना के तहत मृतक को 30 हजार रुपये की धनराशि दी जाती है।
जांच में खुली यह हकीकत
समाज कल्याण विभाग की ओर से की गई जांच में सामने आया कि आवेदकों ने जो परिवार के मृत्यु की तिथि इस वर्ष की दर्शाई हैं। उन परिवार के मुखिया की मृत्यु 5 से लेकर 10 साल पहले तक हो चुकी है। इस कारण यह अपात्र माने गए हैं। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर आवेदकों ने आवेदन किए हैं। इस हकीकत सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों में खलबली मच गई।
शासन की नीति के विपरीत जारी हो रहे ऑफलाइन प्रमाण पत्र
जिले की तहसील सिकंदराराऊ में शासन के आदेशों को दरकिनार करते हुए मनमाने तरीके से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। जिसकी वजह से योजनाओं में फर्जीबाड़ा किया जा रहा है। हैरानी बात यह है कि पूरे जिले में सिकंदराराऊ तहसील को छोड़कर सभी तहसीलों में मृत्यु प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदन जारी किए जा रहे हैं, लेकिन ब्लॉक हसायन व सिकंदराराऊ में आज भी संबंधित जिम्मेदाराना अधिकारियों द्वारा ऑफलाइन मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाकर लाभ लेने की कोशिश की गई थी। जांच में अब तक 22 आवेदक ऐसे पाए गए हैं। इन आवेदकों की धनराशि जारी होने पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इस मामले में संबंधित जिम्मेदाराना कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
शिव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी