न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
पुरातन महत्व के किला परिसर स्थित मंदिर श्रीदाऊजी महाराज का शिखर अचानक टूटकर गिर गया। गनीमत यह रही कि उस प्राचीर के मलबे से किसी तरह की हानि नहीं हुई और हादसा टल गया। मौके पर भीड़ भी एकत्रित हो गई।
किला परिसर स्थित मंदिर श्रीदाऊजी महाराज के सेवारत पुजारी अजय चतुर्वेदी ने बताया कि वह व उनका परिवार दोपहर को मंदिर परिसर में ही मौजूद था। दोपहर करीब 12 बजे मंदिर की प्राचीर टूटकर नीचे आ गई। मंदिर के शिखर का काफी मलबा मंदिर की सीढ़ियाें पर आकर गिरा। मलबा गिरने की आवाज सुनकर वहां काफी लोग एकत्रित हो गए। यह मंदिर काफी प्राचीन है। भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी को समर्पित श्री दाऊजी मंदिर 200 साल पुराना बताते हैं। मंदिर के गर्भगृह की मुख्य छवि भगवान बलराम तथा उनकी पत्नी देवी रेवती की है। मंदिर के निकट ईंटों से ढंका एक टैंक है, जिसे क्षीर सागर के नाम से जाना जाता है। भाद्रपद माह की हर छठ से बीस दिवसीय लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। इसके तहत छह दिवसीय कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया जाता है।
पुरातत्व विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप
प्राचीन मंदिर श्रीदाऊजी महाराज के गुंबद की धातु की करीब पांच फीट ऊंची शिखा पर ध्वजा लगाई जाती थी, उसके क्षतिग्रस्त होने पर लोगों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह पुरातत्व विभाग व स्थानीय प्रशासन की लापरवाही है। पुरातन महत्व के इस मंदिर के रख-रखाव पर पुरातत्व विभाग और प्रशासन ध्यान नहीं देता। इससे भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए इस मामले में उच्च स्तरीय कार्रवाई की जाए। मांग करने वालों में मंदिर सेवायत अजय चतुर्वेदी, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसियेशन के पूर्व अध्यक्ष अतुल आंधीवाल, अजय भारद्वाज एडवोकेट, बिल्लू पुजारी, धीरज वार्ष्णेय, दिनेश खारदार, कैलाशचंद्र एडवोकेट, डौली पहलवान, धीरज शाह, डॉ. नीरज वार्ष्णेय, शंकरलाल अरोड़ा आदि हैं।