न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दल और उनके टिकट के दावेदार जोर-शोर से चुनावी तैयारी में लगे हैं। कुछ राजनेताओं को इस जिले की राजनीति खूब रास आई। उन्हें जनता ने पहले विधायक बनाया और उसके बाद वह लोकसभा में भी पहुंचे। कुछ राजनेता यहां से विधायक तो नहीं बन पाए। उसके बाद उनकी किस्मत चमकी और लोकसभा में पहुंच गए।
जिले में पहले सासनी विधानसभा सीट भी थी। वर्ष 2007 के बाद नये परिसीमन के तहत इसे समाप्त कर दिया गया। इस सीट से विधायक बने रामप्रसाद देशमुख वर्ष 1977 सांसद भी चुने गए। देशमुख को कई बार अलीगढ़ की कोल विधानसभा सीट से जनता ने विधानसभा में पहुंचाया। इसी तरह डॉ. बंगाली सिंह पहले सासनी सीट से विधायक बने और उसके बाद वह हाथरस संसदीय सीट से वर्ष 1989 में जनता दल से सांसद भी चुने गए। हाथरस संसदीय क्षेत्र में पहले कोल विधानसभा सीट भी आती थी। किशनलाल दिलेर पांच बार कोल विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।
उसके बाद वह चार बार भाजपा से हाथरस संसदीय सीट से सांसद भी बने। यही बात उनके पुत्र और वर्तमान सांसद राजवीर दिलेर पर लागू हो रही है। राजवीर दिलेर वर्ष 2017 के चुनाव में अलीगढ़ में इगलास सीट से विधायक चुने गए और वर्ष 2019 के चुनाव में वह हाथरस सीट से सांसद चुने गए। पूरनचंद भी कई बार कोल से विधायक बने और उसके बाद वर्ष 1984 में कांग्रेस के टिकट पर हाथरस सीट से सांसद चुने गए। इसके विपरीत वर्ष 2012 में हाथरस विधानसभा सीट से भाजपा से चुनाव लड़े राजेश दिवाकर विधायक तो नहीं बन पाए और दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में मोदी लहर में वह इसी सीट से सांसद चुन लिए गए। संवाद