फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाथरस : रोडवेज बसों में मार्च तक खत्म हो जाएगी धक्का लगाने की समस्या

विज्ञापन
हाथरस : रोडवेज बस स्टैंड पर अधिकारियों के साथ वार्ता करते नोडल अधिकारी। - फोटो : HATHRAS
विज्ञापन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
विज्ञापन

होली से पहले रोडवेज की सभी बसों में धक्का लगाने की समस्या दूर होगी। डीजल कटौती के नाम पर चालक-परिचालकों से कटौती भी नहीं होगी। आमदनी को ध्यान में रखते हुए सभी बसों में बैटरी व सेल्फ की समस्या दूर की जाएगी। यह बातें शुक्रवार को राज्य परिवहन निगम के महाप्रबंधक विवेक माथुर ने रोडवेज बस स्टैंड के निरीक्षण के दौरान कहीं।
उल्लेखनीय है कि हाथरस डिपो में वर्तमान में 83 बसें हैं। इनमें से करीब 40 बसों में बैटरी व सेल्फ की दिक्कत है। इस कारण यात्रियों को रोडवेज बसों में सवार होने से पहले धक्का लगाना पड़ता है। चालक बस को स्टॉपेज पर चालू रखता है तो उसके वेतन से डीजल के नाम पर कटौती की जाती है। रोडवेज बस स्टैंड पर आगमन के दौरान जीएम विवेक माथुर ने कहा कि होली से पहले सभी बसों में बैटरी व सेल्फ की समस्या को दूर किया जाएगा।
विज्ञापन

लॉकडाउन के दौरान खर्चे कम करने के लिए बसों को सरेंडर कर दिया गया। इस कारण खड़े रहने से बसों में बैटरी व अन्य दिक्कतें आ गईं। कोलकाता की एक कंपनी द्वारा बैटरी भेजी जा रही हैं। जिन बसों में बैटरी की खराबी है, उन्हें बदलने का क्रम जारी है। हाथरस डिपो को 30 नई बैटरी दी गई हैं। बाईपास से रोडवेज बस गुजरने पर उन्होंने कहा कि सभी डिपो के अधिकारियों को इस बारे में पत्र लिखा जाएगा। रात्रि में बसों को शहर के अंदर से निकालने का आदेश दिया जाएगा। इसका पालन न करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। कार्यशाला में भी उन्होंने ने डीजल औसत और आमदनी आदि बिंदुओं पर समीक्षा की। जीएम के आगमन के दौरान अधिकारियों व कर्मियों में खलबली मची रही।
जीएम के सामने खुली बसों की पोल
हाथरस। परिवहन निगम के जीएम विवेक माथुर शुक्रवार को एआरएम कार्यालय में लोड फैक्टर व डीजल औसत की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान एक बस को रूट पर ले जाने के लिए कुछ यात्री उसमें धक्का लगा रहे थे।
विज्ञापन

अब साहब बिल पास नहीं कर रहे
हाथरस। हाथरस डिपो की बस संख्या यूपी 81 एफ-9351 आगरा-देहरादून रूट पर संचालित होती है। बीते दिनों बस गुलावटी के निकट खराब हो गई। इस संबंध में चालक-परिचालक ने फोरमैन को अवगत कराया। फोनमैन ने बस को सही कराने के लिए कहा। चालक-परिचालक ने बस को सही करा लिया। इस पर 27 सौ रुपये का खर्चा आया। अब डिपो के अधिकारी 27 सौ रुपये का बिल पास नहीं कर रहे हैं। इसे लेकर चालक-परिचालक खासे परेशान है। बसस्टैंड व कार्यशाला के चक्कर काट रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें