न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा को खासी उम्मीदें थी। पार्टी ने अपने समर्थित उम्मीदवार को जिताने के लिए काफी जी-जान लगाया था, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं निकला। पार्टी के कई स्टार उम्मीदवार हार गए। सत्ता होने के बाद भी पार्टी समर्थित एक चौथाई उम्मीदवार भी नहीं जीत सके।
सत्ताधारी भाजपा ने जिला पंचायत चुनाव दमदारी से लड़ा था। प्रदेश नेतृत्व ने समर्थित उम्मीदवारों के नाम फाइनल किए थे। यही नहीं चुनाव से एक दिन पहले पार्टी ने 11 ऐसे नेताओं को निष्कासित भी कर दिया था, जोकि या तो बागी बनकर चुनाव लड़ रहे थे या फिर विपक्षी उम्मीदवारों की मदद कर रहे थे लेकिन भाजपा की कोई रणनीति इस चुनाव में काम नहीं पाई।
पार्टी समर्थित केवल पांच उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके। कुछ वार्डों में तो पार्टी उम्मीदवार जमानत भी नहीं बचा सके। सत्ता की हनक भी इसमें काम नहीं आई। अब आगे यह देखना होगा कि जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव पार्टी किस हिसाब से लड़ती है।
पार्टी ने केवल उम्मीदवारों को समर्थन दिया था किसी को अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव तो लड़ाया नहीं था। जहां-जहां से पार्टी समर्थित उम्मीदवार हारे हैं, वहां-वहां समीक्षा की जाएगी। रही जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव लड़ाने की बात तो यह पार्टी हाईकमान तय करेगा।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा