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हाथरस : इंसाफ की जंग जारी, परिजनों को न आवास मिला, न नौकरी

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हाथरस : बिटिया के घर पर तैनात सीआरपीएफ के जवान। संवाद - फोटो : HATHRAS
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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राजा महेंद्र प्रताप और काका हाथरसी सरीखे महान हस्तियों के इस जिले में चंदपा की बिटिया के साथ हुए वारदात के आज एक साल पूरे हो गए। एक साल बाद भी परिजनों के जख्म अभी भी हरे हैं। सीबीआई चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। लेकिन, अभी तक उन्हें सजा नहीं मिली। आवास और सरकारी नौकरी देेने का सरकारी वादा भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। परिजन सीआरपीएफ की कड़ी सुरक्षा के बीच अपने घर में रह रहे हैं।
दरअसल, 14 सितंबर 2020 की सुबह चंदपा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की एक युवती के साथ गांव के ही चार युवकों ने दरिंदगी की थी। आरोपियों ने गला दबाकर उसकी हत्या की भी कोशिश की थी। लगभग 15 दिनों के जद्दोजहद के बाद 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बिटिया ने दम तोड़ दिया था। इसको लेकर महीनों तक जिले की सियासत गरम रही थी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी से लेकर कई बड़े-बड़े नेता पीड़िता के घर पहुंचे थे। युवती की मौत से पहले विपक्षी दलों ने सरकार को घेर लिया। भीम आर्मी भी सरकार के खिलाफ मुखर हुई थी। अन्य राजनीतिक दल भी इसमें कूद पड़े।
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देश-विदेश तक मामला महीनों सुर्खियों में रहा। कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी और राहुल गांधी भी बिटिया के परिजनों के आंसू पोंछने उनके घर आए थे। सारा विपक्ष इस मामले को लेकर एकजुट गया था। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई ने 67 दिन की जांच के बाद चारों आरोपियों संदीप, रवि, लवकुश, रामू के खिलाफ विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में आरोप पत्र दाखिल किया था। कोर्ट ने भी आरोप तय कर दिए थे। अब सजा के बिंदु पर सुनवाई हो रही है।
कब-कब क्या-क्या हुआ
14 सितंबर - चंदपा क्षेत्र के एक गांव में अनुसूचित जाति की युवती के साथ दरिंदगी हुई। जिला अस्पताल से अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। पुलिस ने एक आरोपी संदीप के खिलाफ दर्ज किया जानलेवा हमले और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा।
19 सितंबर - आरोपी संदीप गिरफ्तार हुा।
22 सितंबर - पीड़िता के बयान के आधार पर सामूहिक दुष्कर्म की धारा बढ़ाई। तीन अन्य अभियुक्तों के नाम किए शामिल।
23 सितंबर - दूसरे आरोपी लवकुश को किया गिरफ्तार।
25 सितंबर - तीसरे आरोपी रवि को पुलिस ने किया गिरफ्तार। कोतवाली निरीक्षक चंदपा को किया लाइन हाजिर।
26 सितंबर - चौथे आरोपी रामू को पुलिस ने किया गिरफ्तार।
28 सितंबर - बेहद नाजुक हालत में बिटिया को अलीगढ़ से दिल्ली रेफर किया गया।
29 सितंबर - दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बिटिया ने तोड़ा दम।
2 अक्तूबर - एसपी, सीओ सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित।
4 अक्तूबर - प्रदेश सरकार ने मामले की सीबीआई जांच कराने का लिया निर्णय।
11 अक्तूबर - सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की।
21 नवंबर - सीबीआई जेल में बंद चारों आरोपियों को पॉलीग्राफ टेस्ट व ब्रेन मैपिंग के लिए गुजरात ले गई।
18 दिसंबर - सीबीआई ने जांच के बाद चारो अभियुक्तों के खिलाफ विशेष न्यायालय (एससी-एसटी एक्ट) में दाखिल किया आरोप पत्र।
नोट : अभी सजा के बिंदु पर कोर्ट में सुनवाई हो रही है
शव का जबरन अंतिम संस्कार कराने पर मची थी हाय-तौबा
हाथरस। बिटिया की मौत के बाद जब उसके शव को दिल्ली से रात्रि में उसके गांव लाया गया था तो प्रशासन ने देर रात परिजनों की इच्छा के विपरीत शव का अंतिम संस्कार करा दिया था। तब परिजनों पर बल प्रयोग भी किया गया था। इस पर काफी हाय-तौबा मची थी और सरकार की फजीहत भी हुई थी। इसे हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने संज्ञान में भी लिया था।
मौत से पहले दिया बयान बना था चार्जशीट का मुख्य आधार
अपनी मौत से पहले बयान दिए थे। इसी को सीबीआई ने चार्जशीट में मुख्य आधार बनाया गया था। हत्या की धारा 302, दुष्कर्म की धारा 376, सामूहिक दुष्कर्म की धारा 376 डी, 376 ए, एससी-एसटी एक्ट में यह चार्जशीट दाखिल की गई।
104 बनाए हैं गवाह, 15 की हो चुकी गवाही
हाथरस। न्यायालय ने चारो अभियुक्तों पर आरोप निर्धारित कर दिए हैं। इस मामले में 104 गवाह हैं। कोर्ट में सजा के बिंदु पर सुनवाई हो रही है। चारो आरोपी संदीप, रवि, रामू और लवकुश अलीगढ़ जेल में बिटिया की मौत के पहले से ही निरुद्ध हैं। इस मामले में अब तक सीओ सादाबाद ब्रह्म सिंह, प्रो.एमएफ हुदा चेयरमैन न्यूरो सर्जन विभाग मेडिकल कॉलेज अलीगढ़, मनीष कुमार नायब तहसीलदार कोल अलीगढ़, डॉ. रमेश बाबू चिकित्सक बागला जिला अस्पताल, मीडिया कर्मी गोविंद कुमार शर्मा रवि कुमार के अलावा सरला देवी हेड कांस्टेबल, नेहा पुलिस कांस्टेबल, होमगार्ड शिवकुमार, सना सूबुर नर्सिंग ऑफिसर मेडिकल कॉलेज अलीगढ़, नौसाबा हैदर, डॉ. फैयाज अहमद, डॉ. डालिया रफत सहित 15 लोग गवाही दे चुके है। बिटिया के भाई की गवाही पर अभी बहस जारी है।
दोषियों को मिले कड़ी से कड़ी सजा, तब मिलेगी तसल्ली
हाथरस। बिटिया के परिजन इस घटना से अभी उबरे नहीं है। पूरा परिवार अस्त-व्यस्त है। बिटिया के पिता का कहना है कि बेटी के साथ जो वारदात हुई, उसे वह कभी नहीं भुला सकते। बिटिया के भाई का कहना है कि सरकार ने यह वादा किया था कि उन्हें मुआवजे के साथ-साथ आवास और सरकारी नौकरी दी जाएगी लेकिन एससी-एसटी उत्पीड़न के तहत उन्हें केवल मुआवजा मिला है। अभी तक न आवास मिला है और न ही नौकरी। उसका कहना है कि इस घटना के बाद वह व उसका छोटा भाई नौकरी के लिए भी नहीं जा पा रहे। उनके पास करीब साढ़े तीन बीघा खेती है। जोकि बटाई पर उठा रखी है। एक साल पहले सरकार ने जो मुआवजा दिया है, उसी से घर का खर्च चल रहा है। हम किसी मदद के भूखे नहीं है। हमें बस न्याय चाहिए। जिन लोगों ने उसकी बहन के साथ दरिंदगी कर उसकी हत्या की है, उन्हें ऐसी सजा मिले कि भविष्य में कोई और भी इस तरह की दरिंदगी न कर पाए। बिटिया के पिता का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। बिटिया के परिजनों का यह भी कहना है कि वह सीआरपीएफ की सुरक्षा में सुरक्षित रह रहे हैं।
तीन को नहीं मिली जमानत, एक की याचिका नहीं दाखिल की
हाथरस। इस मामले में चारो अभियुक्त संदीप, रवि, रामू व लवकुश में से तीन अभियुक्तों रवि, रामू व लवकुश की जमानत के लिए याचिका कोर्ट में दायर की गई थी। तीनों की जमानत याचिका कोर्ट में खारिज हो चुकी है। अभी चौथे आरोपी संदीप की याचिका दाखिल नहीं की है। घटना के बाद ही चारो अभियुक्त अलीगढ़ जिला कारागार में निरुद्ध हैं।
हमारे बच्चे निर्दोष, न्यायपालिका पर भरोसा
हाथरस। आरोपियों के परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे निर्दोष हैं और उन्हें गलत फंसाया गया है। आरोपी रामू के पिता राकेश का कहना है कि हमारे बच्चे निर्दोष हैं। राकेश का कहना है कि हमें न्यायपालिका पर भरोसा है और उम्मीद है कि हमारे साथ इंसाफ होगा।
जल्द पूरी होगी सुनवाई, अभियुक्तों को सजा सुनाएगी कोर्ट
हाथरस। वादी पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा पैरवी कर रही हैं। अधिवक्ता महीपाल सिंह निमहोत्रा भी इस पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे हैं। निमहोत्रा का कहना है कि 14 लोगों की गवाही हो चुकी है। अभी मृतका की मां व भाई की गवाही पर बहस चल रही है। उनका कहना है कि कोरोना के चलते भी कामकाज प्रभावित रहा और इसकी वजह से ट्रायल में देरी हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही सुनवाई पूरी होगी और अभियुक्तों को सजा मिलेगी।
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आरोपी पक्ष के अधिवक्ता बोले - आरोपी होंगे दोषमुक्त
हाथरस। आरोपी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मुन्ना सिंह एडवोकेट का कहना है कि अभी इस मुकदमे में गवाह गवाही दे रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है। ऐसे में उम्मीद है कि चारों आरोपी दोष मुक्त होंगे।
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