न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
मेला श्रीदाऊजी महाराज मंदिर के शिखर से कलश का गिरना अशुभ संकेत है। विभिन्न ग्रंथों में, जिसमें धर्म सिंधु, शांति ग्रंथ आदि ग्रंथों में कलश का गिरना अशुभ माना गया है धर्म सिंधु के अनुसार ‘स्वमिनौन मरणम भवेत’ यानी कि स्वामी की हानि ऐसा संकेत है। यह बातें किला परिसर में मंदिर श्रीदाऊजी महाराज शिखर के क्षतिग्रस्त होने के संबंध में नगर के धर्माचार्यों व धार्मिक विद्वानों ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहीं।
पंडित उपेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि शास्त्रोत विधि विधान से शांति विधान संपन्न हो और कलश का नवर्निर्माण करा कर उसी धातु उतनी नाप तोल उतने ही वजन का बनाकर पुन: स्थापित किया जाए। इसके साथ यह जो प्राचीन मंदिर है, उसका जीर्णोद्धार उसके मूल रूप को नष्ट न करते हुए होना चाहिए, जिसकी मांग पिछले कई दशकों से चली आ रही है।
इस मौके पर पं. कृष्ण बल्लभ मिश्र, सेवायत अजय चतुर्वेदी, पुलकित चतुर्वेदी, गीताराम शास्त्री, डॉ. हरीश दीक्षित, गोवर्धननाथ चतुर्वेदी, पवन चतुर्वेदी आदि ने संयुक्त रूप से यथाशीघ्र कलश को स्थापित करने की मांग प्रशासन से की। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुटुंब प्रबोधन के जिला सह संयोजक पंडित गोपाल कृष्ण शर्मा ने कहा कि क्षतिग्रस्त कलश को संरक्षित किया जाए। कलश, तोप का गोला आदि जो ऐतिहासिक वस्तुएं सभी को संरक्षित कर जनता के दर्शनार्थ यहां पर रखा जाए। इस मौके पर विहिप के विभाग अध्यक्ष राजेंद्र चतुर्वेदी, नगर अध्यक्ष मदन गोपाल वार्ष्णेय, संस्कार वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष उपदेश कौशिक, राजीव शर्मा, राजा भैया, राजेंद्र वार्ष्णेय, पवन वशिष्ठ, अमित कुशवाहा आदि मौजूद थे।