गोशाला में बड़ी संख्या में गोवंश बीमार हैं, लेकिन इनके इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन दो या तीन गोवंश दम तोड़ रहे हैं।
क्षेत्र के गांव नगला मियां पट्टी देवरी के माजरा ब्राह्मण व सिंचावली कदीम के निकट लाखों रुपये की लागत से बनाया गो संरक्षण केंद्र बदहाली का शिकार है। मिट्टी का भराव कराए बिना ही इसका संचालन शुरू कर दिया गया है, जिससे बारिश की वजह से गो संरक्षण केंद्र परिसर में जलभराव हो गया है। गोवंश के चारे-पानी का इंतजाम भी बिल्कुल ठीक नहीं है। भूख-प्यास के कारण गोवंश काल कलवित हो रहे हैं।
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गोशाला में बड़ी संख्या में गोवंश बीमार हैं, लेकिन इनके इलाज और स्वास्थ्य परीक्षण की भी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिदिन दो या तीन गोवंश दम तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गो संरक्षण केंद्र में पिछले माह में 22 सितंबर को हुई बारिश का पानी सूख भी नहीं पाया था कि फिर से पांच अक्तूबर को बारिश के बाद केंद्र के मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक पानी भर गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान में गो संरक्षण केंद्र के अंदर 50 से 60 गोवंश 24 घंटे दूषित पानी में ही खड़े और बैठे रहते हैं। इस कारण वह बीमार भी हो रहे हैं। गो संरक्षण केंद्र के अंदर भूमिगत किए गए गोवंश के अस्थि-पंजर भी दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों में इन अव्यवस्थाओं को लेकर खासी नाराजगी है।
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बारिश के कारण गो संरक्षण केंद्र के निकट से गुजर रही ईशन नदी उफान पर है। इस कारण गो संरक्षण केंद्र परिसर में पानी पहुंच गया है। पानी को निकालने के लिए पंपसेट लगा दिए गए हैं, लेकिन राहत नहीं मिल पा रही है। निराश्रित गोवंश को दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रयास किया गया तो ग्रामीणों ने उन्हें नहीं ले जाने दिया। मौसम साफ हो गया है। जल्द ही स्थिति सामान्य हो जाएगी। -सुरेंद्र सिंह, खंड विकास अधिकारी हसायन