न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
अल्लाह के प्यारे नवी हजरत मोहम्मद सलल्लाहु अलैह बसल्लम के नवासों की याद में चांद की 10 तारीख को इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए ताजियों और अलम का जुलूस नहीं निकाला गया। हाथरस, सादाबाद, मुरसान, हसायन, सासनी और मेंडू आदि स्थानों पर ताजियों का जुलूस नहीं निकाला गया।
ऑल इंडिया शेख जमीअतुल अब्बास कमेटी के सदर पूर्व सभासद रईस अहमद अब्बासी के आह्वान पर मुस्लिम भाइयों ने अपने घरों में हसन और हुसैन की याद में दुरुद फाव्हा कराई और शर्बत वितरण किया गया। डॉ. अब्बासी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन और उनके साथी हक की लड़ाई लड़ते हुए कर्बला के मैदान में भूख और प्यास से शहीद हो गए।
उन्होंने कहा कि हक और बातिल कभी एक नहीं हो सकता है। इमाम हुसैन के सदके में सभी मुस्लिम भाइयों ने हिंदुस्तान की तरक्की की दुआ की। हाजी रिजवान, साबिर हुसैन, आजाद कुरैशी, शहजादे खान, वारिस अंसारी, फरहत खान, नदीम हुसैन, जैनुद्दीन खान, अजीम खान, अजहर बेग, इसराइल खान, हाजी नवाब हसन, शहीद कुरैशी आदि थे। संवाद