न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
काफी कश्मकश के बाद आखिरकार सपा ने सिकंदराराऊ सीट से प्रत्याशी घोषित कर ही दिया। सपा ने डॉ. ललित बघेल को इस सीट से प्रत्याशी बनाया है। सपा ने इस सीट पर पिछड़ी जाति केे उम्मीदवार पर दांव लगाकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है। वहीं सपा द्वारा डॉ. बघेल को प्रत्याशी घोषित करने के बाद अन्य दावेदार सन्न रह गए हैं।
उल्लेखनीय है कि रालोद और सपा इस बार मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ रही है। इस गठबंधन में सपा के खाते में हाथरस सदर और सिकंदराराऊ सीटें आई हैं, जबकि सादाबाद की सीट रालोद के पाले में गई है। रालोद काफी पहले प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी को सादाबाद विधानसभा सीट से उम्मीदवार घोषित कर चुका है। सपा ने हाथरस सदर सीट से भी बृजमोहन राही को प्रत्याशी बना दिया था। सिकंदराराऊ सीट को लेकर कई दिन से कश्मकश चल रही थी। सूत्रों की मानें तो यहां सपा के दो गुट अपने-अपने समर्थक दावेदारों को टिकट दिलवाने में लगे थे। आलाकमान तक सारी रिपोर्ट भी पहुंचाई जा रही थी। ऐसे में अन्य दलों के प्रत्याशियों व क्षेत्र के जातीय समीकरण को भी सपा ने प्रत्याशी घोषित करते समय परखा। यहां से भाजपा ने वीरेंद्र सिंह राना, जोकि वर्तमान में इसी पार्टी के विधायक हैं, को प्रत्याशी बना रखा है, जबकि बसपा ने भी भाजपा के सजातीय अवधेश सिंह पर दांव लगाया है। दोनों ही ठाकुर बिरादरी से हैं।
कांग्रेस ने भी वैश्य बिरादरी की डॉ. छवि वार्ष्णेय को मैदान में उतारा है। अब सारे जातीय समीकरणों को देखकर सपा ने यहां पिछड़ी जाति के डॉ. ललित बघेल पर दांव लगाया है। सूत्रोें के मुताबिक सपा की रणनीति है कि यहां बघेल, यादव और मुसलमानों के अलावा अन्य कुछ बिरादियों के वोट पाकर यह आसानी से सीट निकाल लेगी। इस सीट पर ठाकुर बिरादरी के वोटर सबसे ज्यादा हैं। साथ ही यादव, बघेल और मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। पिछली बार बसपा ने बघेल जाति के ही बनी सिंह बघेल को यहां से उम्मीदवार बनाया था। वह दूसरे नंबर पर आए थे। ऐसे में सपा ने अब इस सीट के लिए पिछड़ी जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा है।
पार्टी ने डॉ. ललित बघेल को प्रत्याशी घोषित किया है। उन्हें बी. फॉर्म भी दिया गया है। वही लोग विरोध कर रहे हैं, जिन्हें टिकट नहीं मिला है। पूरे क्षेत्र की जनता हमारे साथ है और हमारी जीत होगी।
-जसवंत सिंह यादव, जिलाध्यक्ष सपा