डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर से जारी हुआ दिव्यांग प्रमाणपत्र
दिव्यांग बोर्ड में शामिल एक डॉक्टर ने कहा कि प्रमाण पत्र पर मौजूद नहीं है उनके हस्ताक्षर
रेलवे के किराए में छूट का फार्म भरवाने के लिए आवेदक आया डॉक्टर के पास तो सामने आई हकीकत
घनश्याम सिंह
हाथरस। स्वास्थ्य विभाग में दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाए जाने के नाम पर चल रहे खेल की एक तस्वीर सामने आई है। दिव्यांग बोर्ड में शामिल एक डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है। इस बात की हकीकत डॉक्टर के सामने आई तो वह भी दंग रह गए और अब वह सर्टिफिकेट भी डॉक्टर ने अपने पास रख लिया है, ताकि उसे निरस्त किया जा सके।
सात जनवरी 2019 को सीएमओ दफ्तर से नवीपुर निवासी तेजप्रकाश पुत्र मलखान सिंह का दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जबकि दिव्यांग बोर्ड में शामिल हड्डी रोग विशेषज्ञ ने इस प्रमाण पत्र को जारी नहीं होने की रिपोर्ट लगाई थी, फिर भी 40 फीसदी दिव्यांगता वाला यह प्रमाण पत्र जारी हो गया है।
इस पर दिव्यांग बोर्ड में शामिल सभी डॉक्टरों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, लेकिन एक डॉक्टर के सामने जब यह प्रमाण पत्र पहुंचा तो उन्होंने तुरंत की अपने हस्ताक्षरों की पहचान की और प्रमाण पत्र के फर्जी होने की बात कहने लगे। डॉक्टर ने पुलिस बुलाने की बात कही तो यह सुनकर तेज प्रकाश चौंक गया और वहां से तुरंत ही भाग गया।
हैरत में पड़ गए डॉक्टर
दिव्यांग बोर्ड में शामिल हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके मल्होत्रा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे थे। डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि तेज प्रकाश यहां पर आया और उसने रेलवे के किराए में छूट का फार्म हाथ में थमाते हुए उसे भरने को कहा। डॉ. मल्होत्रा ने दिव्यांग प्रमाण पत्र देखा तो वह हैरत में पड़ गए, क्योंकि उनके सामने जो दिव्यांग प्रमाण पत्र था, उसे उन्होंने जारी नहीं करने की रिपोर्ट लगाई थी।
आखिर किसने लिए एक हजार रुपये
यहां पर तेज प्रकाश ने बताया कि सीएमओ दफ्तर से जब उसे दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किया गया, उस वक्त दफ्तर के एक व्यक्ति ने उससे प्रमाण पत्र बनवाए जाने के लिए एक हजार रुपये लिए थे। रुपये लेकर ही प्रमाण पत्र जारी किया गया।
कराई जाएगी जांच, दोषियों पर होगी कार्रवाई
इस मामले की पूरी जांच कराई जाएगी। सभी से कह रखा है कि किसी को भी कोई रुपया प्रमाण पत्र आदि के नाम पर नहीं दिया जाए, फिर भी लोग नहीं मानते हैं।
-डॉ. बृजेश राठौर, सीएमओ