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हाथरस: पेट्रोल-डीजल के बिलों में सरचार्ज के नाम पर घोटाला

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पेट्रोल-डीजल के बिलों में सरचार्ज के नाम पर घोटाला
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डीआरडीए में बिलों के भुगतान में आया मामला सामने
नाजिर को प्रतिकूल प्रविष्टि, लेखाकार को चेतावनी जारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
हाथरस। जिले में कुछ पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल डीजल के भुगतान में सरचार्ज के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें कई विभाग शामिल हैं। फिलहाल डीआरडीए में इस घोटाले की परत खुली हैं। इसे लेकर सीडीओ ने डीआरडीए के नाजिर को प्रतिकूल प्रविष्टि और लेखाकार को चेतावनी जारी की है। इन पेट्रोल पंपों के संचालकों को नोटिस जारी रकम की वसूली करने की तैयारी भी की जा रही है।
जिले में अब एक ऐसे घोटाले परतें खुलकर सामने आने लगी हैं, जिसने विभागीय अधिकारियों के होश फाख्ता कर दिए हैं। जिले के ज्यादातर विभाग इसकी जद में आ रहे हैं। जिले के सभी विभागों में कार्यरत गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल पेट्रोल पंपों से डलवाया जाता है। इसके भुगतान के बिलों में बड़ा घोटाला सामने आया है। इस घोटाले की पकड़ डीआरडीए में हुई है। डीआरडीए में लंबे समय से पेट्रोल डीजल के भुगतान में पेट्रोल पंप संचालकों को दो फीसदी के सरचार्ज के साथ भुगतान किया जाता रहा है, जबकि इस तरीके से सरचार्ज के भुगतान करने का कोई प्राविधान नहीं है।
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वर्तमान में पीडी डीआरडीए एके मिश्र के सामने जब पेट्रोल-डीजल के भुगतान बिल प्रस्तुत हुए तो संज्ञान में आया कि बिलों में दो फीसदी का सरचार्ज लगाया जा रहा था। जब इस संबंध में विभागीय कर्मचारियों से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने बताया कि बिलों पर यह सरचार्ज लगकर आता है, तो भुगतान कर दिया जाता है। इस मामले को गंभीरता से लेने पर पीडी ने उच्चाधिकारियों को पूरे प्रकरण से अवगत कराया गया तो इस मामले की जांच शुरू हुई।
डीआरडीए में जांच के लिए एएसओ दिनेश कुमार सिंह को नामित किया गया। बिना नियम के दो फीसदी सरचार्ज का भुगतान किए जाने के मामले में नाजिर सुरेश चंद्र गुप्ता को प्रतिकूल प्रविष्टि और लेखाकार संजय पालीवाल को चेतावनी दी गई है। इस मामले वर्तमान बिलों भुगतान होने के बाद इन बिलों में सरचार्ज की वसूली पेट्रोल पंप संचालकों से कर ली गई है। कई विभागों में विभागीय अधिकारियों द्वारा गोपनीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
वर्ष 2009 से सरचार्ज के नाम पर हो रहा गबन
हाथरस। डीआरडीए में पेट्रोल व डीजल बिलों में दो फीसदी सरचार्ज लगे बिलों का भुगतान किया जाता था। यह प्रक्रिया वर्ष 2009 से शुरू की गई। हालांकि बिलों में सरचार्ज लगने के लिए किसी भी प्रकार का कोई नियम नहीं है। इसके बावजूद लेखाकार व नाजिर द्वारा इन बिलों का भुगतान किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि लेखाकार और नाजिर लंबे समय से नियम विरुद्ध तरीके से इन बिलों का भुगतान अधिकारियों से कराते रहे। अब इस मामले के सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
जांच के दायरे में आएंगे कई विभाग
हाथरस। जिले के कई विभाग के अधिकारी व कर्मचारी पेट्रोल डीजल के भुगतान में दो फीसदी सरचार्ज दिए जाने के मामले के सामने आने के बाद परेशान हैं। कई विभागों में सरचार्ज के साथ ही भुगतान किया जाता रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद सीडीओ द्वारा कई विभागों में यह जांच शुरू कराई जा रही है, ताकि घोटाले की परतें खुलकर सामने आ सकें। कई विभागों में विभागीय अधिकारी अपने कर्मचारियों को बचाने की जुगत में जुट गए हैं, क्योंकि कई विभागों में अधिकारियों की शह पर यह काम जोरों पर चल से रहा है।
पेट्रोल पंप संचालकों को नोटिस देने की तैयारी
हाथरस। जिले में विभागों से कई पेट्रोल संचालक जुडे़ हुए हैं, जिनके माध्यम से सरकारी गाड़ियों में पेट्रोल व डीजल डाला जाता है। इनमें से उन पेट्रोल संचालकों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है, जो बिलों में सरचार्ज लगाकर विभागों को बिल प्रस्तुत करते हैं। प्रशासन की ओर से इन पेट्रोल संचालकों से सरचार्ज के नाम पर ली गई धनराशि की वसूली की जाएगी।
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कई वर्षों से पेट्रोल व डीजल बिलों में दो फीसदी सरचार्ज दिए जाने का मामला संज्ञान में आया है। इस मामले की जांच की जा रही है, जो भी अधिकारी व कर्मचारी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब तक जो धनराशि दी गई है, उसकी भी वसूली की जाएगी।
-आरबी भास्कर, सीडीओ
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