हाथरस साकार हरि सत्संग का हादसे से पहले का दृश्य
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हाथरस में हुए सत्संग हादसे की न्यायिक जांच रिपोर्ट इसी सप्ताह सदन में पेश हो सकती है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा जाना है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में जिन प्रशासनिक एवं पुलिस के अधिकारियों को दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
बता दें कि न्यायिक जांच आयोग ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में राज्य सरकार को अपनी जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। वहीं 20 फरवरी को कैबिनेट ने रिपोर्ट को सदन में रखने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की थी। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में भोले बाबा उर्फ नारायण साकार हरि की भगदड़ में हुई मौतों में कोई भूमिका नहीं पाई गई है। हालांकि स्थानीय एसडीएम और सीओ समेत कई सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही का जिक्र किया गया है।
घटना के बाद राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम रवींद्र कुमार, सीओ आनंद कुमार, तहसीलदार सुशील कुमार, थाना प्रभारी आशीष कुमार, चौकी प्रभारी बृजेश पांडेय और मनवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने सत्संग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर लापरवाही बरती थी।
वहीं आयोजकों द्वारा तथ्यों का छिपाकर कार्यक्रम की अनुमति ली गई, जिसका सही से सत्यापन तक नहीं किया गया। आयोजकों द्वारा सारी व्यवस्था खुद करने से अचानक उमड़ी भीड़ को पुलिस नियंत्रित नहीं कर सकी।