न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
मोदी सरकार के आम बजट से मध्यम वर्ग निराश है। लोगों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल पर उपकर लगाने से महंगाई और ज्यादा बढ़ेगी। रोजमर्रा की जरूरत के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, ऑटो पार्ट्स, कॉटन और सिल्क के कपड़ों की कीमत बढ़ने से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा। जिले के उद्यमियों का कहना है कि जिले के परंपरागत उद्योगों के लिए बजट में कुछ खास नहीं है। कुटीर उद्योग के लिए जरूर पैकेज की घोषणा की गई है तो हो सकता है कि इसका लाभ आने वाले समय में यहां के दाल, हींग, पावरलूम, हैंडीक्राफ्ट, मेटल, अचार-मुरब्बा और रंग-गुलाल आदि उद्योगों को मिल जाए।
जानकार इसे किसानों का बजट बता रहे हैं। गृहणियों का कहना है कि जब आम जरूरत की चीजों पर महंगाई बढ़ेगी तो उनकी रसोई का खर्च भी बढ़ेगा। सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी कम होने से आभूषण सस्ते होंगे। मोबाइल फोन और ऑटो पार्ट्स के सामान की कीमतों में वृद्धि के संकेत भी इस बजट में मिल गए हैं।
किसानों का कहना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर जो घोषणा की गई है, वह स्वागत योग्य है, लेकिन इसे धरातल पर अमल में लाया जाए। वरिष्ठ इस बात से खुश हैं कि अब 75 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में छूट मिलेगी। इसे यह लोग अच्छा कदम बता रहे हैं।
----हाथरस के उद्योगों पर एक नजर---------
दाल उद्योग
55 छोटी-बड़ी दाल मिलें हैं जिले में
11 सौ कुंतल प्रतिदिन दालों का उत्पादन।
100 करोड़ रुपये करीब सालाना टर्नओवर।
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हींग कारोबार
50 बड़ी हींग फैक्टरियां हैं जिले में
100 छोटी हींग फैक्टरियां
23 करोड़ रुपये सालाना का टर्नओवर।
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रंग गुलाल का कारोबार
करीब 20 रंग गुलाल की फैक्ट्रियां हैं।
करीब 30 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
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रेडीमेड गारमेंट्स कारोबार
250 रेडीमेड गारमेंट्स की इकाइयां।
140 पंजीकृत इकाइयां।
110 गैर पंजीकृत इकाइयां।
500 करोड़ रुपये सभी यूनिट का टर्नओवर।
50 से 70 प्रति यूनिट में कारीगर।
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अचार मुरब्बा उद्योग--
22 से 25 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर।
15 पंजीकृत फैक्टरियां।
12 गैर पंजीकृत फैक्टरियां।
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मेटल कारोबार
125 पंजीकृत मेटल यूनिटें।
100 से ज्यादा गैर पंजीकृत इकाइयां।
50 से 60 करोड़ रुपये प्रति यूनिट का कारोबार।