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हाथरस : 15 साल का सूखा खत्म करने के लिए बेताब रालोद

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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
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विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में सभी सियासी दल जीत के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। सपा-रालोद गठबंधन के तहत सादाबाद विधानसभा सीट रालोद के खाते में गई है। इस सीट पर जीत के लिए रालोद ने एड़ी से चोटी तक जोर लगा दिया है।
यह सीट जीतना रालोद नेताओं के लिए नाक का सवाल बन गया है। यदि जिले के चुनावी इतिहास को देखें तो सिकंदराराऊ सीट पर रालोद कभी जीत हासिल नही कर पाया। हाथरस विधानसभा सीट पर कई बार पार्टी मुख्य मुकाबले में रही।
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वर्ष 2002 में रालोद के प्रत्याशी देवस्वरूप शर्मा दूसरे स्थान पर रहे तो 2007 में देवेंद्र अग्रवाल भी रालोद से चुनाव लड़े और दूसरे स्थान पर आए। इतना ही नही वर्ष 2009 में रालोद और भाजपा के गठबंधन के तहत रालोद की सारिका सिंह ने हाथरस संसदीय सीट पर जीत हासिल की।
रालोद की सबसे ज्यादा मजबूत सिथति जाटलैंड सादाबाद में रही। यहां वर्ष 2001 के उपचुनाव में रालोद से रामसरन आर्य ने जीत हासिल की। उसके बाद वर्ष 2002 में रालोद के ही प्रताप चौधरी जीते। वर्ष 2007 में रालोद से डॉ. अनिल चौधरी ने जीत हासिल की।
पिछले चुनाव में जब पूरे प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही थी, तब भी इस सीट पर बसपा और रालोद में ही मुख्य मुकाबला रहा और रालोद दूसरे स्थान पर रहा। इस बार रालोद और सपा का गठबंधन है। सादाबाद सीट रालोद के खाते में गई है।
रालोद ने यहां से प्रदीप उर्फ गुड्डू चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। गुड्डू चौधरी का मुख्य मुकाबला भाजपा से चुनाव लड़ रहे पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय व बसपा प्रत्याशी डॉ. अविन शर्मा से है।
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रालोद हर हालत में यह सीट जीतना चाहता है। रालोद नेताओ का मानना है कि जाटलैंड सादाबाद में उन्हें पार्टी का परंपरागत वोट तो मिलेगा ही और साथ ही सपा से गठबंधन का लाभ भी मिलेगा। इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए रालोद काफी बेताब है और पूरा जोर लगा रहा है।
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