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हाथरस : बजट की आस में खरीदकर पानी पी रहे 65 गांवों के बाशिंदे

सार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरसजिले के 65 गांव खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।अब इन ग्रामों में खारे पानी की समस्या को दूर करने के लिए जल निगम ग्रामीण की ओर से 94 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की गई है।गांव से तीन किलोमीटर दूर नलकूप पर मीठा पानी आता है।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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जिले के 65 गांव खारे पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। इन गांवों को इस समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए जल निगम की ओर से 33 पेयजल परियोजनाओं की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को बजट की स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है, लेकिन बजट के इंतजार में इन गांवों के बाशिंदे या तो दूर-दराज से शुद्ध और मीठा पानी लाकर पीने के लिए मजबूर हैं या फिर गांव में ही खरीदकर पानी पीना पड़ता है।
जिले की तहसील सादाबाद और विकास खंड हसायन के करीब 65 गांवों में आज भी खारे पानी की समस्या बनी हुई है। इस समस्या से निजात के लिए समय-समय पर जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों व समाजसेवी संगठनों ने आवाज उठाई है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि कुछ ग्रामों में इस समस्या के निजात के लिए पाइप लाइन बिछाकर पानी की आपूर्ति जरूर पहुंचाई गई, लेकिन रखरखाव न होने के कारण पाइपलाइन और टंकियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कुछ टंकियां तो बनने के बाद से ही दिखावटी बनी हुई हैं।
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अब इन ग्रामों में खारे पानी की समस्या को दूर करने के लिए जल निगम ग्रामीण की ओर से 94 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की गई है। इनमें से 33 डीपीआर को जिला स्तर से स्वीकृत कर बजट की स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। अब इन परियोजनाओं के लिए बजट जारी होने का प्रशासन व संबंधित विभाग को इंतजार है, जिससे इन ग्रामों में पानी की पाइप लाइन बिछाकर पेयजल की आपूर्ति की जा सके। संवाद
इन ग्राम पंचायतों में खारे पानी की समस्या
मंस्या, नौगांव, अरौठा, गुरसौटी, गीगला, जारऊ, कंजौली, वेदई, जैतई, नानऊ, नौपुरा, मई, अभयपुरा, मिढ़ावली, गहचौली, गुखरौली, गढ़उमराव, सिथरापुर, जटोई सहित हसायन क्षेत्र के कई गांव।
हमारे गांव में खारे पानी की समस्या है। खरीदकर पानी पीना पड़ता है। गांव से तीन किलोमीटर दूर नलकूप पर मीठा पानी आता है। 400 रुपये महीने में घर के लिए बाइक और साइकिल पर रखकर पानी लेकर आना पड़ता है। कई बार आश्वासन तो मिला है लेकिन अभी तक गांव में टंकी का कहीं भी निर्माण नहीं हुआ है।
-धर्मवीर सिंह, बीडीसी, मिढ़ावली
गांव में पानी नमकीन है। यहां से ढाई किलोमीटर पर जाकर पीने के लिए पानी लाना पड़ता है, अन्यथा पानी खरीदना पीना पड़ता है। आसपास के 24 गांव के लोग भी यहां से पानी लेने जाते हैं। कई बार शिकायत की गई है, लेकिन आज तक इस गंभीर समस्या से निजात नहीं मिली है।
सत्यवीर सिंह, मिढ़ावली
इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए 33 परियोजनाओं की डीपीआर को बजट की स्वीकृति के लिए शासन को भेजी गई है। शासन स्तर से बजट जारी होते ही इन पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अब तक कुल 94 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार की गई है।
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-मोहम्मद इमरान, अधिशासी अभियंता जल निगम ग्रामीण।
लगातार खारा पानी पीने से पथरी बनने का डर होता है। इससे दांतों और हड्डी रोगों की आशंका बढ़ जाती है। चेहरे और बालों में रूखापन आ जाता है। इस समस्या का निदान अति आवश्यक है। इससे पेट के रोगों के होने की आशंका भी होती है। रोगों से बचाव के लिए स्वच्छ पानी की जरूरत होती है। - डॉ. पीके श्रीवास्तव, वरिष्ठ चिकित्सक, बागला जिला अस्पताल।
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