न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
सरसों के तेल और रिफाइंड के दामों में कमी आने से महंगाई से बेहाल आम लोगों को काफी राहत मिली है। सरसों के तेल के दाम 20 रुपये प्रति किलो तो रिफाइंड की कीमतें 30 रुपये प्रति किलो तक कम हो गई हैं। जानकारों की मानें तो यह नरमी किसानों द्वारा सरसों के स्टॉक को मंडियों में निकालने के बाद आई है। शादियों के सीजन में तेल के दामों में इस कमी का फायदा शादी समारोहों के आयोजकों को भी होगा।
उल्लेखनीय है कि तिलहन का उत्पादन और उपज मांग के अनुरूप नहीं होने से भारतीय बाजार विदेशी खाद्य तेलों पर निर्भर हो गया है। इस मांग को पूरा करने के लिए 50 फीसदी तक तेल का आयात होता है। अब विदेशी बाजार में तेल की कीमत गिरने के साथ जिले में भी खाद्य तेलों की कीमतों में कमी देखने को मिली रही है।
जानकार बताते हैं कि काफी किसानों ने सरसों का स्टॉक कर रखा था, जिससे मंडियों में सरसों गायब हो गई थी। सरसों के तेल के दामों में तेजी आने की एक वजह यह भी थी। अब बाजार में सरसों की आवक बढ़ने से इसके तेल के दाम 20 रुपये प्रति किलो तक कम हो गए हैं। जो रिफाइंड कोरोना काल में 175 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, उसके दाम भी अब 130 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं।
विदेशी बाजार में तेल के दामों में गिरावट आई है। साथ ही जिन किसानों ने सरसों का स्टॉक कर रखा था, अब वह सरसों को मंडी में ला रहे हैं। ऐसे में सरसों के तेल व रिफाइंड के दामों में कमी आ रही है। इससे आम लोगों को राहत मिलेगी।
-अनिल वार्ष्णेय, तेल कारोबारी
तेल के बढ़ते दामों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया था। अब तेल व रिफाइंड के दाम गिरने से काफी राहत मिली है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए खास कदम उठाने चाहिए, ताकि आमजन को राहत मिले।
-रविकांत दीक्षित, ग्राहक