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हाथरस: अब शहरों की तरह ग्रामीणों को बिजली सप्लाई देने की कवायद

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हाथरस
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अब शहर के बाद ग्रामीण अंचल में भी शहर की तरह बिजली आपूर्ति देने की तैयारी चल रही है, ताकि गांवों में उद्योग-धंधे विकसित हो सकें और लोगों को रोजगार मिल सके। इसके लिए महकमे ने बेहतर आपूर्ति देने की कोशिश तेज कर दी है। इन दिनों शेड्यूल के तहत 16 से 18 घंटे बिजली दी जा रही है। अब इसको धीरे-धीरे बढ़ाया जायेगा। जिन गांवों में 15 प्रतिशत से अधिक बिजली चोरी है, उन पर बिजली अफसरों की सीधी नजर है। जल्दी इन गांवों में भी बिजली चोरी पर शिकंजा कसा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। साथ ही लोगों को कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए झटपट योजना, सुगम कनेक्शन आदि योजनाओं का क्रियान्वयन किया गया है, ताकि लोगों को आसानी से बिजली कनेक्शन मिल सके। अब इस क्रम में सरकार द्वारा शहरों की तरह गांव को भी बिजली देने की तैयारी शुरू कर दी गई है, क्योंकि गांव में लगने वाली नई उद्योग धंधे सही तरीके से विकसित हो सके। दिनों 16 से 18 घंटे विभागीय अधिकारी बिजली सप्लाई देने की बात कह भी रहे। अब इसको बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
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गांव में नलकूप और घरेलू आपूर्ति की लाइन हुई अलग
केंद्र सरकार द्वारा फीडर सेपरेशन के तहत घरेलू व नलकूप लाइनों को अलग कराया गया है, जिसमें जिले में 96 फीडरों से जुड़े गांव में नलकूप व घरेलू लाइनें अलग हो गई हैं। बाकी लाइनों को भी जल्द अलग किया जाएगा। इन दिनों नलकूपों को 10 घंटे बिजली आपूर्ति दी जा रही है। घरेलू उपभोक्ताओं को 15 16 घंटे आपूर्ति का शेड्यूल इन-दिनों चल रहा है। इस शेड्यूल में अब बढ़ोतरी की कवायद शुरू हो गई है ।
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बिजली चोरी वाले इलाक़ों में होगी कटौती
शहर से देहात तक जिन इलाकों में 15 फीसदी से अधिक बिजली चोरी हो रही है, वहां पर निगम के अफसरों ने साफ निर्देश दिए हैं बिजली की कटौती की जाए। चोरी पर अंकुश लगाया जाए। इसे देखते हुए बिजली अधिकारी अब कार्य योजना तैयार करने में जुटे हुए हैं। जल्द बिजली चोरी का ग्राफ नीचे आने की उम्मीद है। अधीक्षण अभियंता हरिमोहन का कहना है कि ग्रामीण अंचल में 15 से 16 घंटे बिजली सप्लाई दी जा रही है। जहां 15 फीसदी से अधिक बिजली चोरी है, वहां कटौती के साथ निर्देश दिए गए और सरकार की मंशा के अनुरूप बिजली सप्लाई को बढ़ाने की कोशिश चल रही हे।
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