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हाथरस : शक्ति के नौ नाम, काम से हासिल किया मुकाम

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हाथरस : महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करतीं अनु विमल। संवाद - फोटो : HATHRAS
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गोविंद उपाध्याय
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हाथरस। जिले में कई महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उन्होंने अपनी कार्यशैली से अपने अपने क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया है। समाज को सशक्त बनाने में इन महिलाओं ने सराहनीय योगदान दिया है।
कोई गरीबों को न्याय दिलाने के लिए कृत संकल्पित है तो कोई उनकी सेवा में तत्पर। एक महिला जहां उनको शिक्षित करने में सेवा भाव से समर्पित हैं तो कोई उनको स्वावलंबी बनाने में अहम भूमिका अदा कर रही हैं। किसी ने जज तो किसी ने वैज्ञानिक बनकर तो किसी ने पत्रकार बनकर देश सेवा का निर्णय लिया। चैत्र नवरात्र की नवमी पर आज हम ऐसी ही नौ महिलाओं की खूबियों का जिक्र कर रहे हैं। संवाद
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कानून के प्रति जागरुक कर रहीं चेतना सिंह
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव चेतना सिंह सहृदयता, कर्तव्य निष्ठा और न्यायप्रियता के लिए जानी जाती हैं। वह प्राधिकरण की ओर से शिविर लगाकर लोगों में कानून के प्रति जागरुकता लाने का कार्य पूरी शिद्दत से कर रही हैं। प्राधिकरण के शिविर के माध्यम से शासन की विभिन्न विभागीय योजनाओं की जानकारी लोगों को मिलती है और जरूरतमंद जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में आवेदन देकर योजनाओं का लाभ उठाते हैं। सचिव चेतना सिंह गरीबों को न्याय दिलाने के लिए कृत संकल्पित हैं। उनका कहना है कि पैसे के अभाव में कोई भी व्यक्ति न्याय पाने से वंचित न रहे। वह समाज में लोगों को मानवीय जीवन मूल्यों को आत्मसात करने के लिए प्रेरित करती हैं। वह लोगों में विधिक जागरुकता ला रही हैं, जिससे व्यक्ति अपने अधिकारों एवं दायित्वों को जान सके।
इसरो में वैज्ञानिक बन अपूर्वा ने बढ़ाया बेटियों का मान
जिले के कस्बा सासनी की एक बिटिया ने इसरो में वैज्ञानिक बनकर बेटियों का मान बढ़ाया है। कस्बा सासनी के मोहल्ला अग्रवाल निवासी प्रदीप अग्रवाल की बेटी अपूर्वा अग्रवाल ने वैज्ञानिक बनकर कई महत्वपूर्ण गौरवमयी उपलब्धियां हासिल की हैं। सेटेलाइट सिस्टम के माध्यम से अपूर्वा ने गगनयान एवं चंद्रयान दो की विश्वसनीयता टीम में काम किया है। उन्होंने ओसियन सेट तीन की फाइनल टेस्टिंग में अहम भूमिका निभाई है। यह सेटेलाइट मछुआरों और आम आदमी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। रिसोर्ट इमेजिंग सेटेलाइट पर भी काम किया है, जो मौसम के पूर्वानुमान और इमेजिंग के लिए उपयोगी है। सेटेलाइट सिस्टम के माध्यम से समुद्री मछुआरों को किसी भी अनहोनी की चेतावनी पूर्व में ही दी जा सकती है। उनके सेटेलाइट सिस्टम पर कई महत्वपूर्ण कार्य हैं। अपूर्वा के पिता अलीगढ़ में ताले के थोक व्यापारी हैं।
सामाजिक कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहती हैं मनीषा
वरिष्ठ पत्रकार मनीषा उपाध्याय शहर की इकलौती महिला पत्रकार हैं। उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोतर किया है। वह ट्रिपल एमए हैं। मनीषा 15 से भी अधिक वर्षों से इस क्षेत्र में हैं। उन्होंने अपनी खबरों के माध्यम से समाज में एक शानदार पहचान बनाई है। मनीषा ने विशेष तौर पर समाज से जुड़ी खबरों नारी सशक्तीकरण, सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाई है और उनके प्रति लोगों को जागरुक करने का कार्य किया है। इनकों उत्कृष्ट कार्य के लिए कई पुरस्कार भी मिले हैं। मनीषा को इसी वर्ष बृज भूमि फाउंडेशन द्वारा देश की 101 इन्फ्लुएंस महिलाओं में शामिल किया गया है। पिछले वर्ष मनीषा को हिम्मती हाथरस-साहसी नारी के तहत सम्मानित किया गया था। वह सामाजिक कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहती हैं।
महिलाओं को स्वावलंबी बना रहीं अनु विमल
मातृ मंडल सेवा भारती की विभाग संयोजिका डॉ. अनु विमल महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए अहम भूमिका निभा रही हैं और महिलाओं को सशक्त बनाने में सराहनीय योगदान दे रही हैं। उन्होंने हरिजन बस्तियों में सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर केंद्र एवं प्रौढ़ शिक्षा केंद्र खोले, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिला। अनु विमल समाज की सेवा पूरी तत्परता से कर रही हैं। उनका मानना है कि परिवार को सही दशा और दिशा प्रदान करने में नारी की अहम भूमिका होती है, इसलिए प्रत्येक महिला को शिक्षित और स्वावलंबी होना चाहिए। जब महिलाएं शिक्षित होंगी तो वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दे सकेंगी। तब हमारा समाज सभ्य व सुसंस्कृतज्ञ बन सकेगा।
पीड़ितों को न्याय दिला रहीं एडीजीसी प्रतिभा राजपूत
प्रतिभा राजपूत जिले की पहली महिला एडीजीसी हैं। वह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। वह पीड़ित महिलाओं और व्यक्तियों को विधिक सलाह देकर उनकी कानूनी रूप से मदद करती हैं। वह न्यायालय में स्टेट की ओर से मुकदमों में पैरवी करती हैं। प्रतिभा राजपूत अपने व्यक्तिगत जीवन में सरल व सौम्य स्वभाव की मानी जाती हैं। उनका मानना है कि पीड़ितों को न्याय दिलाना ही उनकी प्राथमिकता है। वह पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हमेशा प्रतिबद्धता जताती हैं।
शिक्षा का अलख जगा रहीं डॉ. ऋचा शर्मा
शहर के प्रकाश टैक्सटाइल की रहने वाली डॉ. ऋचा शर्मा तीन विषयों में एमए होने के साथ एमएड व पीएचडी हैं। वह शिक्षा के लिए समर्पित हैं। उन्होंने कई गरीब बच्चों की मदद की है। उनका कहना है कि शिक्षा के बल पर ही व्यक्ति गरीबी, अन्याय और अत्याचार से मुक्ति पा सकता है। डॉ. ऋचा अपना प्रोग्रेस पॉइंट कोचिंग इंस्टिट्यूट चला रही हैं, जिसमें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराती हैं। उनका कहना है कि यदि कोई बच्चा पैसे के अभाव में तैयारी करने से वंचित रह रहा हो तो वह मेरे कोचिंग में आकर निशुल्क तैयारी कर सकता है। वह शिक्षा के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने के लिए समर्पित हैं।
कुपोषित बच्चों को प्रदान कर रहीं सुपोषण
गांव दयानतपुर स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र पर तैनात रेनू रावत कुपोषण के शिकार बच्चों के सुपोषण की लड़ाई पूरी तन्मयता से लड़कर अपने काम को बखूबी अंजाम दे रही हैं। रेनू रावत की कर्तव्यनिष्ठा के कई मामले हैं। दयानतपुर गांव में कुपोषण के शिकार बच्चे, जो अब स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, वह रेनू की कर्तव्यनिष्ठा और जुझारूपन की मिसाल हैं। रेनू का आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का सफर मुश्किल भरा रहा। शुरुआत में लोग उनके काम को समझ ही नहीं पाए, परंतु उन्होंने बता दिया कि अगर ठान लो तो कोई काम मुश्किल नहीं है। रेनू ने अपने क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम कुपोषण को सुपोषण में बदलने का किया है।
खेलों में परचम लहरा रहीं मोनू रावत
बेटियां अब किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। शहर से सटे गांव दयानतपुर की बिटिया मोनम रावत ने खेल के क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। मोनम ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी लेवल पर अमेरिकन फ्लैग फुटबॉल में गोल्ड मेडल हासिल किया है। वह शहर के पीसी बगला महाविद्यालय की बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनके पिता किसान हैं। मोनम की खेलों में अभिरुचि है। वह क्रिकेट और कबड्डी में स्टेट लेवल पर खेल चुकी हैं और दो बार नेशनल लेवल पर अमेरिकन फ्लैग फुटबॉल खेल में भी हिस्सा ले चुकी हैं।
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बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दी तालीम
तहसील सासनी के गांव छौंड़ा गढ़ौआ की रहने वाली सीमा खान ने बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उर्दू की तालीम दी, जिससे उन बेटियों का प्रवेश अच्छे संस्थान में संभव हो सका। उन्होंने सिलाई कढ़ाई सिखा कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महनीय भूमिका निभाई है। वही बच्चों को उर्दू की तालीम देकर अच्छे संस्थान में प्रवेश के काबिल बनाया। यह कार्य उन्होंने बिना किसी शुल्क के सेवार्थ भाव से किया है। सीमा खान आज भी समाज के गरीब तबके के बच्चों के उत्थान के लिए समर्पित हैं। वह एएमयू से स्नातक हैं। वह समान भाव से हिंदू मुस्लिम बच्चों को उर्दू की तालीम देती हैं।
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