महिला जिला अस्पताल में हंगामे के दौरान लगी भीड।
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जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं। इसे लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। ओपीडी में एक भी डॉक्टर के न बैठने की शिकायत सीएमएस के पास लेकर पहुंचे तो वहां पर भी वह पल्ला झाड़ते हुए नजर आए।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी, वार्ड में भर्ती महिला मरीज और इमरजेंसी की जिम्मेदारी एक मात्र डॉ. वंदना पांडेय पर थी। ओपीडी में आए मरीजों को भी डॉ. पांडेय ही देख रहीं थीं। इसी बीच एक महिला अपनी समस्या लेकर ओपीडी में पहुंची, लेकिन यहां पर एक भी डॉक्टर के न होने पर वह इमरजेंसी में लगी डॉक्टर के पास पहुंची। इसी बीच यहां पर डिलीवरी का एक इमरजेंसी केस आया गया, जिसे देखने में डॉ. पांडेय व्यस्त हो गईं। इसी बात से गुस्साई एक महिला रोगी यहां पर खुद को न देखने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगी। यहां पर काफी भीड़ लग गई। इस मामले की शिकायत लेकर मरीज के साथ के युवक-युवती सीएमएस के पास पहुंचे। जिस पर उन्होंने भी मामले को इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर के ऊपर ही टाल दिया।
एक महिला आई थी, जो ज्यादा सीरियस भी नहीं थी। इसीलिए उसे न देखकर पहले इमरजेंसी वाले केस को देखा गया। रही बात अभद्रता और मरीज को न देखने की तो यह निराधार है, क्योंकि मेरे पास जो भी ओपीडी का मरीज आ रहा है, उसे देख रही हूं।
-डॉ.वंदना पांडेय, वरिष्ठ महिला चिकित्सक
हमारे यहां डॉक्टरों की भारी कमी चल रही है। कई डॉक्टर काफी लंबे समय से छुट्टी पर चल रही हैं। इसलिए ओपीडी व इमरजेंसी की जिम्मेदारी एक ही डॉक्टर संभाल रही हैं। मरीज से अभद्रता के बारे में डॉक्टर से पूछा जाएगा।
- डॉ. रुपेंद्र गोयल, सीएमएस महिला अस्पताल